स्वास्थ्य विभाग,जिला प्रशासन एवं सरकार की दूरदर्शी नीतियों से अब सामान्य व गरीब वर्ग के मरीजों को भी मिल रही लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की नि:शुल्क सुविधा
Junaid Khan - शहडोल। प्रदेश की संवेदनशील सरकार और जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण व दूरस्थ अंचल के अंतिम व्यक्ति तक उत्कृष्ट स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। जिला चिकित्सालय शहडोल में स्वास्थ्य महकमे के डॉक्टरों व विशेषज्ञों की समर्पित टीम ने एक बार फिर यह साबित कर दिखाया है कि अब गरीब और असहाय मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों या महंगे निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसी क्रम में, हरी गांव की निवासी 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला बुग्गन बैगा (पति किंदा बैगा), जो पिछले तीन महीनों से पेट के असहनीय दर्द से पीड़ित थीं, का जिला अस्पताल में पूरी तरह से सफल दूरबीन (लैप्रोस्कोपिक) ऑपरेशन किया गया है। मरीज को पिछले लंबे समय से गंभीर पीड़ा का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन जिला अस्पताल की तत्परता और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के चलते अब वे पूरी तरह स्वस्थ और दर्दमुक्त हैं। यह सफलता जिला प्रशासन की दूरदर्शी कार्यशैली और स्वास्थ्य विभाग की सजगता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। चिकित्सकीय जांच प्रक्रिया की बात करें तो अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल वृद्धा की सभी आवश्यक जांचें करवाईं। अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) जांच रिपोर्ट में महिला की पित्त की थैली (Gallbladder) में कई पथरी होने की पुष्टि हुई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मरीज को तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कर पांच दिनों तक गहन चिकित्सीय निगरानी में रखा गया और आवश्यक दवाओं व प्राथमिक उपचार के बाद 13 अगस्त को आधुनिक लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी (Laparoscopic Cholecystectomy) तकनीक से सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। जिला अस्पताल के जाने-माने जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अपूर्व पाण्डेय ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला चिकित्सालय में इस अत्याधुनिक दूरबीन तकनीक की नियमित शुरुआत से न केवल ग्रामीण एवं बैगा जनजाति के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि ऑपरेशन के बाद मरीज बिना किसी बड़े चीरे या ज्यादा दर्द के बहुत जल्द स्वस्थ होकर अपने घर लौट सकेंगे। जिला चिकित्सालय की सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी ने स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन के इस सराहनीय कदम पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सरकार और स्वास्थ्य महकमे की मंशा के अनुरूप अब जिला अस्पताल में केवल पित्त की थैली की पथरी ही नहीं, बल्कि अपेंडिक्स, ओवरी की गांठ (Ovarian Cyst), लैप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी (बच्चेदानी का दूरबीन से ऑपरेशन) तथा पेट संबंधी अन्य आवश्यक जटिल सर्जरी भी 'मिनिमल एक्सेस तकनीक' (Minimal Access Surgery) से लगातार की जा सकेंगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) तथा जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों का इस व्यवस्था को सुचारू बनाने में विशेष मार्गदर्शन व योगदान रहा है। अधिकारियों के इस कुशल प्रबंधन और समर्पित डॉक्टरों की टीम वर्क की सर्वत्र सराहना हो रही है। इस सफल ऑपरेशन से क्षेत्र की जनता में खुशी की लहर है और लोगों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास और भी अधिक सुदृढ़ हुआ है।
