टेलीग्राम पर झांसा देकर लूटी शादी की जमापूंजी, खैरहा थाने से लेकर साइबर सेल तक केवल औपचारिक कागजी कार्रवाई
Junaid Khan - शहडोल। संभाग मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में पैर पसार चुका साइबर अपराध अब आम जनता की गाढ़ी कमाई और सपनों को लील रहा है। पुलिस प्रशासन और हाईटेक दावों वाली साइबर सेल की सुस्ती का ही नतीजा है कि ऑनलाइन ठग बेखौफ होकर आए दिन नए शिकार ढूंढ रहे हैं। ताजा मामला खैरहा थाना क्षेत्र का है, जहां शहडोल में रहकर डेंटल की पढ़ाई कर रही एक होनहार छात्रा साइबर ठगों का शिकार बन गई। आरोपियों ने टेलीग्राम ग्रुप के जरिए रकम दोगुनी करने का प्रलोभन देकर छात्रा से 10 लाख रुपये से अधिक की राशि ठग ली। हैरानी की बात यह है कि पीड़िता का परिवार उसके पिता द्वारा खदान (कालरी) में की गई मेहनत की कमाई और बेटी के विवाह के लिए लिए गए लोन की रकम को सहेज रहा था, जिसे ठगों ने महज दो सप्ताह में साफ कर दिया। इस बड़ी घटना के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से केवल खानापूरी और ढुलमुल जांच का रवैया देखने को मिल रहा है, जिससे जिले की साइबर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक मुस्तैदी पर गहरे सवाल खड़े हो रहे हैं।
विवाह के लिए जुटाया था फंड, ठगों के जाल में फंसी छात्रा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित छात्रा शहडोल में डेंटल कोर्स की पढ़ाई कर रही है। उसके पिता कालरी कर्मचारी हैं, जिन्होंने बेटी के उज्ज्वल भविष्य और उसकी शादी की तैयारियों के लिए बैंक से लोन लेकर और जीवन भर की बचत से कुछ राशि जमा की थी। इसी दौरान छात्रा टेलीग्राम ऐप पर 'निवेश से कमाई' का दावा करने वाले एक ग्रुप से जुड़ गई। ग्रुप के जालसाजों ने छात्रा को भरोसे में लिया कि निवेश की गई रकम बेहद कम समय में दोगुनी हो जाएगी। आरोपियों के झांसे में आकर छात्रा ने गत 31 जुलाई से बताए गए विभिन्न बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। ठगों ने शुरुआत में फर्जी आंकड़े और रिटर्न दिखाकर छात्रा का विश्वास जीता। देखते ही देखते करीब 14 दिनों के भीतर छात्रा ने 10 लाख रुपये से अधिक की बड़ी रकम आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में डाल दी। जब तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी पैसे वापस नहीं मिले और वह टेलीग्राम ग्रुप ही अचानक बंद हो गया, तब पीड़िता को अहसास हुआ कि उसके साथ कितना बड़ा धोखा हो चुका है।
मुंबई-बेंगलुरु तक फैला जाल, फिर भी ठप्प पड़ी है पुलिस की तफ्तीश
घटना के बाद बदहवास पीड़िता ने खैरहा थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन कार्रवाई की गति कछुआ चाल से भी धीमी है। प्रारंभिक तकनीकी जांच में यह बात सामने आई है कि ठगी की गई भारी-भरकम राशि के तार मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों के बैंक खातों से जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद, शहडोल पुलिस और साइबर सेल की भूमिका केवल डिजिटल फुटप्रिंट खंगालने की रस्म अदायगी तक ही सीमित दिख रही है। सवाल यह उठता है कि जब लगातार जिले के नागरिक-विशेषकर युवा और छात्र-ऑनलाइन ठगी के शिकार हो रहे हैं, तब पुलिस विभाग और साइबर सेल द्वारा जनजागरूकता और तकनीकी ट्रैकिंग के मोर्चे पर ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं? केवल एफआईआर दर्ज कर जांच का हवाला देना क्या जिम्मेदार अधिकारियों की नाकामी को नहीं छिपाता? यदि समय रहते साइबर अपराधियों पर सख्त नकेल नहीं कसी गई और अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में और भी परिवार अपनी जीवनभर की कमाई गंवाने पर मजबूर होंगे।
