ठेकेदारों की मनमानी और तंत्र की सुस्ती पर उठे गंभीर सवाल,क्या ज़िम्मेदार अधिकारी साधे हुए हैं मौन?
Junaid Khan - शहडोल। शहडोल से जबलपुर तक फैले 16 लाख रुपये के शराब तस्करी कांड में आधा महीना बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। डिंडोरी जिले के शहपुरा थाना क्षेत्र में 31 जुलाई की रात विक्की ढाबा के पास से लगभग 1500 पेटी अवैध शराब की खेप बरामद की गई थी, जिसकी अनुमानित कीमत 16 लाख रुपये बताई गई थी। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि यह शराब शहडोल के अधिकृत ठेकेदार द्वारा अवैध रूप से जबलपुर भेजी जा रही थी। हालांकि, 15 दिन का लंबा समय बीत जाने के बावजूद मुख्य आरोपी ज्वाला सिंह और राजेश सिंह पुलिस की पकड़ से पूरी तरह बाहर हैं। शहपुरा पुलिस की विशेष टीम द्वारा 12-13 अगस्त को शहडोल में दी गई दबिश भी बेनतीजा साबित हुई, जिससे प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस पूरे मामले ने शराब ठेकेदारों की बेखौफ मनमानी और आबकारी विभाग की संदेहास्पद भूमिका को पूरी तरह से उजागर कर दिया है। स्थानीय जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जिन आबकारी अधिकारियों पर शराब के अवैध कारोबार को रोकने का दारोमदार है, वे मामले की लीपापोती करने में लगे हैं। आबकारी निरीक्षक रजनीश त्रिपाठी के उस बयान ने भी लोगों को हैरान किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि "यदि शहडोल की दुकान से अन्य जिलों में तस्करी हो रही है तो यह जांच का विषय है और अमले की कमी के कारण कार्रवाई नहीं हो पाती।" नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि करोड़ों के राजस्व वाले इस व्यापार में क्या ठेकेदारों को कानून से ऊपर होने की खुली छूट दे दी गई है? मामले की तह में जाने पर यह तथ्य सामने आता है कि शहडोल में संचालित 7 शराब दुकानों का ठेका एग्रो कंपनी के पास है, जिसके संचालक मंडल में लक्ष्मी प्रकाश जायसवाल, संदीप जायसवाल, स्वाति जायसवाल और संमृदा जायसवाल शामिल हैं। शहपुरा पुलिस द्वारा 2 अगस्त को शहडोल की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में की गई छापेमारी के दौरान मुख्य आरोपी सीताशरण भी मौका पाकर फरार हो गया था। पुलिस और आबकारी विभाग की इस ढुलमुल कार्यशैली के कारण जनता में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और पुलिस तंत्र वास्तव में सख्त होता, तो अब तक आरोपी सलाखों के पीछे होते, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे तंत्र को अनदेखा कर रहे हैं।
क्षेत्रीय निवासियों और जागरूक नागरिकों ने इस मामले में राज्य सरकार और शासन के उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। जनता का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ दबिश का नाटक करने से अपराध खत्म नहीं होंगे, बल्कि शराब सिंडिकेट और उनसे सांठगांठ रखने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। यदि जल्द ही फरार आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई और अवैध शराब के इस काले कारोबार पर लगाम नहीं कसी गई, तो क्षेत्रीय जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
