शहडोल के सिंदुरी/विचारपुर खदान प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप,उग्र आंदोलन की चेतावनी
Junaid Khan - शहडोल। जिले के सिंदुरी/विचारपुर स्थित अल्ट्राटेक कोल माइंस प्रबंधन की मनमानी और तानाशाही रवैये को लेकर स्थानीय श्रमिकों और भू-विस्थापित परिवारों का आक्रोश अब सड़कों पर उतरने लगा है। अपनी पैतृक जमीनें कंपनी को सौंपने वाले ग्रामीण और दिन-रात हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले मजदूर आज खुद को छला हुआ महसूस कर रहे हैं। श्रम नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाते हुए स्थानीय कामगारों को बिना किसी वाजिब कारण के नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। आलम यह है कि खदान में काम करने वाले श्रमिकों को नियमानुसार तय न्यूनतम वेतन तक नसीब नहीं हो रहा है। खदान परिसर के भीतर सुरक्षा मानकों और मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है, जिससे हर वक्त मजदूरों के सिर पर खतरे की तलवार लटकी रहती है। रोजगार का सपना दिखाकर जमीनें हड़पने के बाद अब अल्ट्राटेक प्रबंधन अपने पुराने वादों से पूरी तरह मुकर चुका है, जिससे क्षेत्र में असंतोष की ज्वाला भड़क उठी है।
मजदूरों और विस्थापितों के हक और सम्मान की इस लड़ाई को धार देते हुए जिला कांग्रेस कमेटी शहडोल के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन के माध्यम से पूरे मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी प्रबंधन के खिलाफ तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। कांग्रेस नेता अजय अवस्थी ने इस दौरान शासन-प्रशासन और अल्ट्राटेक प्रबंधन को सीधे शब्दों में आड़े हाथों लेते हुए कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मजदूरों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कंपनी प्रबंधन ने अपनी तानाशाही पर लगाम नहीं लगाई, बाहर निकाले गए निर्दोष श्रमिकों को ससम्मान काम पर वापस नहीं लिया और भू-विस्थापित परिवारों को वादे के मुताबिक रोजगार मुहैया नहीं कराया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। श्रम विभाग की रहस्यमयी खामोशी और जिला प्रशासन की ढुलमूल कार्यशैली पर भी अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप हैं कि औद्योगिक घरानों के दबाव में जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर नकेल कसने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि अगर मजदूरों को जल्द न्याय नहीं मिला, तो पार्टी खदान के मुख्य गेट से लेकर कलेक्ट्रेट परिसर तक ईंट से ईंट बजा देगी। पूंजीपतियों के मुनाफे के लिए गरीब, किसान और मजदूरों की बलि चढ़ाने के इस खेल के खिलाफ अब निर्णायक संघर्ष का बिगुल फूंक दिया गया है।

