बस स्टैंड पर बेकाबू होता अवैध कब्जा,आंखें मूंदे बैठा प्रशासन, खामोश पुलिस और बदहाल यातायात व्यवस्था

यात्रियों की जान आफत में,चौराहों पर लगा रहता है लंबा जाम,आखिर किसके शह पर सड़क किनारे फल-फूल रहा है अवैध पार्किंग का धंधा?


Junaid Khan - शहडोल। शहर के बस स्टैंड क्षेत्र में यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और जिम्मेदार तंत्र मूकदर्शक बना हुआ है। बस स्टैंड में प्रवेश करते ही मुख्य मार्ग और आसपास की सड़कों पर बेतरतीब खड़े ऑटो-रिक्शा के कारण आम जनता का निकलना मुहाल हो गया है। सड़क किनारे गाड़ियों के जमावड़े से सड़कें संकरी हो चुकी हैं, जिससे सुबह से लेकर देर रात तक भीषण जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। बस संचालकों, बस चालकों और दूर-दराज से आने-जाने वाले यात्रियों को इस अव्यवस्था से सबसे अधिक जुझना पड़ रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि एक साथ दर्जनों ऑटो बीच सड़क पर घेरकर खड़े रहते हैं, लेकिन इन्हें अनुशासित करने या तय सीमा में खड़ा कराने के लिए मौके पर एक भी यातायातकर्मी नजर नहीं आता। स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि प्रशासन और पुलिस विभाग की इस सुस्ती और अनदेखी के चलते ही बस स्टैंड क्षेत्र अब हादसों का हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। अव्यवस्था की पराकाष्ठा यह है कि केवल ऑटो ही नहीं, बल्कि कई बस सर्विस संचालकों के चारपहिया वाहन और निजी गाड़ियां भी सड़क के मुहाने पर ही खड़ी रहती हैं। सड़क के दोनों ओर बेतरतीब पार्किंग के कारण एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों को भी रेंग-रेंग कर निकलना पड़ता है। बस स्टैंड की ओर जाने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को वाहन से उतरकर सड़क पार करने में जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। नगर पालिका प्रशासन, जिला पुलिस और यातायात विभाग की इस संयुक्त नाकामी और सुस्त कार्यप्रणाली पर अब उंगलियां उठने लगी हैं। सवाल यह खड़ा होता है कि रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही वाले इस मुख्य इलाके में अतिक्रमणकारियों और अवैध पार्किंग करने वालों के खिलाफ ठोस और प्रभावी कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? क्या प्रशासनिक अमला किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि नगर पालिका की इंफोर्समेंट टीम से लेकर यातायात पुलिस के पास कार्रवाई के नाम पर केवल रस्म अदायगी रह गई है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO), यातायात थाना प्रभारी (RI/DSP ट्रैफिक) और संबंधित क्षेत्र के थाना प्रभारी—की जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है। यदि जल्द ही बस स्टैंड क्षेत्र में नो-पार्किंग जोन का कड़ाई से पालन नहीं कराया गया, ऑटो चालकों के लिए स्टैंड तय नहीं किया गया और अवैध रूप से सड़कें घेरने वालों पर चालानी व दंडात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई, तो नागरिक सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि सो रहा जिला प्रशासन और पुलिस महकमा इस जनसमस्या पर कब जागता है और कब जमीनी स्तर पर सख्त कदम उठाता है।

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