राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति का मामला: संस्था प्रमुखों की मनमानी से पोर्टल पर नहीं हुआ पंजीयन, भविष्य अधर में
Junaid Khan - शहडोल। राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना (NMMSS) के तहत चयनित निर्धन व प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का भविष्य शिक्षा विभाग के बेलगाम अफसरों और लापरवाही संस्था प्रमुखों की कार्यप्रणाली की वजह से दांव पर लग गया है। जिलेभर के हाईस्कूल व हायर सेकंडरी विद्यालयों के प्राचार्यों की घोर अनदेखी का आलम यह है कि अंतिम तिथि सिर पर होने के बावजूद 13 विद्यार्थियों के नवीन और 11 विद्यार्थियों के नवीनीकरण पंजीयन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं की गई है। सरकार एक ओर जरूरतमंद विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता देकर आगे बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जिला स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों व संस्था प्रमुखों की सुस्ती इस योजना की मंशा पर पानी फेर रही है। जिले में कुल 108 नवीन और 251 नवीनीकरण पंजीयन का लक्ष्य तय था, लेकिन नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर प्रक्रिया पूरी करने के बजाय जिम्मेदार दफ्तरों के चक्कर काटने और कागजी पत्राचार तक ही सीमित रहे। यदि तय समयावधि में यह प्रक्रिया पूर्ण नहीं होती है, तो जिले के 24 होनहार छात्र-छात्राएं सीधे तौर पर अपनी हक की छात्रवृत्ति राशि से वंचित हो जाएंगे।
कागजी हिदायतों तक सिमटा प्रशासन, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बजाय सिर्फ चेतावनी का खेल
इस पूरे घटनाक्रम में शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढुलमुल रवैये पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला हाथ से निकलने की कगार पर पहुंचने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अतुल चौधरी ने नाराजगी जताते हुए अंतिम स्मरण पत्र जारी किया है और प्राचार्यों को सख्त निर्देश दिए हैं। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि जब समयावधि समाप्त होने आई है, तब केवल पत्राचार और नोटिस का खेल क्यों खेला जा रहा है?DEO के पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि यदि पंजीयन न होने के कारण कोई छात्र योजना के लाभ से वंचित रहता है, तो संबंधित संस्था प्रमुख का नाम अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए वरिष्ठ कार्यालय भेजा जाएगा। लेकिन स्थानीय स्तर पर मॉनिटरिंग की इस भारी चूक के लिए प्राथमिक स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के बजाय केवल प्राचार्यों पर ठीकरा फोड़कर पल्ला झाड़ने की कोशिश की जा रही है। छात्रवृत्ति जैसे संवेदनशील विषय पर शासन और जिला प्रशासन की इस लचर कार्यप्रणाली से आक्रोश पनप रहा है, क्योंकि संस्था प्रमुखों की हठधर्मिता और ढिलाई का खामियाजा उन होनहार छात्रों को भुगतना पड़ सकता है जिनके लिए यह छात्रवृत्ति पढ़ाई का एकमात्र जरिया है।
