लाखों फूंकने के बाद भी दलदल में तब्दील अंडरब्रिज, अफसरों की चुप्पी पर जनता में आक्रोश

कल्याणपुर-कोइलारी में नाकारा ड्रेनेज सिस्टम बना मुसीबत,ठेका कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों की सांठगांठ पर उठे गंभीर सवाल 


Junaid Khan - शहडोल। विकास के दावों और प्रशासनिक दावों की जमीनी हकीकत देखनी हो, तो कल्याणपुर-कोइलारी स्थित रेलवे अंडरब्रिज चले आइए। रेलवे प्रशासन द्वारा जल निकासी के नाम पर लाखों रुपये का बजट पानी की तरह बहा दिया गया, लेकिन थोड़ी सी बारिश होते ही यह अंडरब्रिज तालाब और दलदल में तब्दील हो जाता है। सरकारी खजाने से लाखों रुपये का आहरण हो चुका है, फिर भी स्थिति 'जस की तस' बनी हुई है। इस बदहाली का सीधा और मुख्य कारण ठेका कंपनी द्वारा जल निकासी कार्य में बरती गई घोर लापरवाही और घटिया निर्माण कार्य है। सही और सुचारू ड्रेनेज व्यवस्था न होने के कारण हल्की सी फुहार पड़ते ही अंडरब्रिज लबालब भर जाता है। जिम्मेदार अधिकारियों ने इस बदहाली की तरफ से आंखें मूंद ली हैं, जिससे साफ जाहिर होता है कि ठेका कंपनी की इस मनमानी और भ्रष्टाचार पर शासन-प्रशासन का मौन संरक्षण प्राप्त है।

मासूम बच्चों व राहगीरों की जिंदगी से खिलवाड़, प्रशासन मस्त-जनता त्रस्त

इस अव्यवस्था और प्रशासनिक नाकामी का सबसे खौफनाक और बुरा असर स्कूली छात्र-छात्राओं तथा पैदल चलने वाले आम लोगों पर पड़ रहा है। छोटे-छोटे मासूम बच्चे गंदे और बदबूदार पानी से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं, जिससे हर वक्त गंभीर बीमारियों और हादसों का खतरा बना रहता है। प्रतिदिन सैकड़ों राहगीरों और वाहन चालकों को इस गंदे पानी और जलभराव के बीच से गुजरना पड़ रहा है, जो उनकी नियति और मजबूरी बन चुका है। जब रेलवे प्रशासन और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से इस संबंध में बात की जाती है, तो वे केवल कागजी खानापूरी और कोरे आश्वासनों का पुलिंदा बांध देते हैं। लाखों का बजट डकारने वाली ठेका कंपनी पर अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई न होना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा करता है।

जनता का सब्र टूटा, ठेका कंपनी पर ब्लैकलिस्टिंग और पक्की निकासी की उठी मांग

स्थानीय निवासियों और क्षेत्रीय जनता का गुस्सा अब सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि सरकारी राशि की सरेआम बर्बादी और जनता को मुसीबत में धकेलने वाले इस समूचे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। क्षेत्रवासियों ने शासन व उच्चाधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि जल निकासी में भारी लापरवाही बरतने वाली भ्रष्ट ठेका कंपनी के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए। इसके साथ ही, कागजों से बाहर निकलकर धरातल पर जल्द से जल्द पक्की और स्थायी जल निकासी व्यवस्था का निर्माण कराया जाए। यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों और ठेका कंपनी पर नकेल नहीं कसी गई और समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में उग्र जनआंदोलन और उग्र विरोध प्रदर्शन तय है, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी रेलवे व स्थानीय प्रशासन की होगी।

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