इंजीनियरों की लापरवाही से फंसा मॉडल रोड, कारोबार ठप और जनता बेहाल,क्या कलेक्टर और सीएमओ लेंगे सख्त एक्शन?

सर्वे में झोल से लटका निर्माण,निरीक्षण के दावों की खुली पोल,भुखमरी की कगार पर पहुंचे व्यापारी 


Junaid Khan - शहडोल। इंदिरा चौक से न्यू बस स्टैंड तक बनने वाली शहर की बहुप्रतीक्षित मॉडल रोड का निर्माण कार्य नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों की घोर लापरवाही के कारण अधर में लटक गया है। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले नगरपालिका के तकनीकी अमले और इंजीनियरों ने जो पोल शिफ्टिंग सर्वे रिपोर्ट तैयार की थी, वह पूरी तरह अदूरदर्शी और अधूरी साबित हुई है। उसी खामियों भरे सर्वे के आधार पर टेंडर जारी कर ठेकेदार से काम भी करा लिया गया, लेकिन अब कई बिजली के खंभे रास्ते में जस के तस खड़े हैं। बिना पोल शिफ्ट किए आगे का काम होना असंभव है। अब दोबारा सर्वे और नया टेंडर निकालने की प्रक्रिया की बात कही जा रही है। सवाल यह उठता है कि जब पूर्व में सर्वे का काम इंजीनियरों द्वारा किया गया था, तब यह बड़ी गलती कैसे हुई? इस घोर तकनीकी लापरवाही के लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरी प्रशासनिक मशीनरी मौन बैठी है। निरीक्षण और निर्देशों के बावजूद हालात ढाक के तीन पात, जनता को समझा मजाक जिला प्रशासन और नगरपालिका के बड़े अधिकारी समय-समय पर मौके पर पहुंचकर निरीक्षण का ढोंग तो करते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत में कोई बदलाव नज़र नहीं आता। सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश तिवारी और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े करते हुए कहा है कि कलेक्टर एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के भौतिक निरीक्षण और कड़े निर्देशों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। निरीक्षण के बाद आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अधिकारियों के जुबानी जमा-खर्च के अलावा धरातल पर कुछ नहीं बदला। बारिश के दिनों में यह आधी-अधूरी सड़क दलदल का रूप ले लेती है, जिससे आए दिन लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं। प्रशासनिक अमला और नगरपालिका के कर्मचारी-अधिकारी आम जनता की परेशानियों को दरकिनार कर केवल अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ने में मस्त हैं। 

कारोबार पूरी तरह ठप,अब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट 

अधिकारियों और ठेकेदारों की इस लेटलतीफी व गैर-जिम्मेदाराना रवैये की सबसे भारी कीमत बस स्टैंड रोड के स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को चुकानी पड़ रही है। महीनों से सड़क की खुदाई और अधूरे पड़े काम के कारण दुकानों तक ग्राहकों का पहुंचना लगभग बंद हो चुका है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि कई छोटे दुकानदारों का व्यापार पूरी तरह से ठप हो गया है और उनके परिवारों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। व्यापारी दिनभर दुकान खोलकर बैठते हैं, लेकिन धूल, कीचड़ और मलबे के कारण बोहनी तक नहीं हो पा रही है। जिला प्रशासन और नगर पालिका की इस सुस्ती ने व्यापारियों को दाने-दाने का मोहताज बनाकर रख दिया है, लेकिन जनता के प्रति अधिकारियों का रवैया बेहद असंवेदनशील बना हुआ है।

कलेक्टर और सीएमओ की कार्यप्रणाली पर सवाल,क्या केवल बयानों तक सीमित रहेगी कार्रवाई?

मामले में मुख्य नगर पालिका अधिकारी आशा जितेंद्र भंडारी का कहना है कि नया सर्वे जल्द कराकर टेंडर जारी किया जाएगा और बस स्टैंड की ओर काम शुरू कराने के निर्देश ठेकेदार को दिए गए हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिस बिजली विभाग और नगरपालिका के इंजीनियरों की गलत योजना के कारण शासन-प्रशासन की थू-थू हो रही है और जनता पिस रही है, उन अधिकारियों पर अब तक गाज क्यों नहीं गिरी? क्या कलेक्टर और सीएमओ केवल कागजी पत्राचार और नए टेंडर की आड़ में दोषी इंजीनियरों को बचा रहे हैं? जब तक इस जनविरोधी और लापरवाह अमले के खिलाफ निलंबन और कड़ी विभागीय कार्रवाई नहीं होगी, तब तक शहर में विकास के नाम पर इसी तरह जनधन की बर्बादी और जनता का उत्पीड़न जारी रहेगा।

Previous Post Next Post