NCCF का बकाया भुगतान अटका; जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठने लगे सवाल, हड़ताल व ठप मिलिंग की आहट
Junaid Khan - शहडोल। प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन की वादाखिलाफी तथा प्रशासनिक तंत्र की घोर लापरवाही के चलते शहडोल जिले का राइस मिलिंग उद्योग आज पूरी तरह से बर्बादी के कगार पर पहुँच गया है। वर्षों से जिले के आर्थिक चक्र को गति देने वाले और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए अनाज तैयार करने वाले राइस मिलर्स अब तंत्र की लालफीताशाही और उदासीनता के शिकार हो चुके हैं। एनसीसीएफ (NCCF) द्वारा पिछले दो वित्तीय वर्षों से किए गए काम का बारदाना यूजेस और किराया भुगतान अटका कर रखने से मिलर्स भीषण आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। आलम यह है कि बैंकों के भारी-भरकम लोन, बिजली के बिल और मिल में काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों के भुगतान तक के लालें पड़ गए हैं। इसके बावजूद न तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों (विधायक, सांसद) के कानों पर जूं रेंग रही है और न ही खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभाग के आला अफसर इस गंभीर समस्या की सुध ले रहे हैं। शासन-प्रशासन की इसी उपेक्षात्मक नीति के विरोध में गुरुवार को शहडोल राइस मिल एसोसिएशन ने पूरी मजबूती के साथ एकजुट होकर जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा और व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने की कड़ी चेतावनी दी। ओपन कैप में सड़ रही धान, जबरन थोपी जा रही घटिया क्वालिटी: अफसरों की मिलीभगत पर सवाल ज्ञापन में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र की कारगुजारियों की पोल खोलकर रख दी है। मिलर्स का स्पष्ट आरोप है कि उपार्जन केंद्रों से उन्हें ओपन कैप में रखी गई सड़ी और अत्यधिक खराब गुणवत्ता वाली धान थमाई जा रही है। खुले आसमान नीचे सड़ चुकी इस धान से जब चावल तैयार किया जाता है, तो वह पीला पड़ जाता है। इसके बाद भारतीय खाद्य निगम (FCI) के कड़े मापदंडों के कारण यह चावल रिजेक्ट हो जाता है, जिसकी पूरी मार बेकसूर मिलर्स पर पड़ती है। राइस मिलर्स की जायज मांग है कि उन्हें ओपन कैप के बजाय सरकारी गोदामों में सुरक्षित रखी गई बेहतर गुणवत्ता वाली धान के 'डीओ' (Delivery Order) जारी किए जाएं, ताकि वे एफसीआई के मानकों के अनुरूप चावल तैयार कर सकें। इसके अलावा, एफसीआई में चावल जमा कराने के लिए जिले के भीतर ही गोदाम स्थान (स्टैक स्लॉट) उपलब्ध कराने की मांग की गई है। फिलहाल मिलर्स को बुकिंग के दौरान जिले से बाहर के दूर-दराज के केंद्र दिए जा रहे हैं, जिससे न केवल परिवहन खर्च बढ़ रहा है बल्कि चावल जमा करने की गति भी पूरी तरह धीमी पड़ गई है। सांसद-विधायक मौन, ज्ञापन सौंपने वालों ने दिखाया साहस; जल्द निराकरण न होने पर ठप होगा कामकाज जिले के विकास और उद्योगपतियों-व्यापारियों के हितों का दम भरने वाले क्षेत्रीय सांसद, विधायक और जिम्मेदार मंत्री इस गंभीर संकट पर पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं। जनप्रतिनिधियों की इस अनदेखी के बीच शहडोल राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सैय्यद अजहर महफूज, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहम्मद जकरिया, कोषाध्यक्ष सुनील जसवानी, मंत्री दीपक सरावगी, वरिष्ठ सहमंत्री प्रतीक गुप्ता, सचिव मोहम्मद सुहैल, सह-सचिव मोहम्मद कादिर एवं संरक्षक मोहम्मद नसीब सहित अन्य पदाधिकारियों ने जिस निर्भीकता और एकजुटता के साथ प्रशासन के सामने यह मुद्दा उठाया है, वह अत्यंत सराहनीय है। मिलर्स ने साफ कर दिया है कि यदि एनसीसीएफ और खाद्य विभाग ने समय रहते वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के बकाए राज्यांश, बारदाना किराए और डंप चावल के बकाए का तुरंत निपटारा नहीं किया, तो फंड की भारी कमी के कारण एफडीआर (FDR) और बैंक गारंटी (Bank Guarantee) बनवा पाना असंभव हो जाएगा। यदि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मामले पर तत्काल कड़ा संज्ञान लेकर मिलर्स का पूरा भुगतान नहीं कराया, तो आगामी दिनों में पूरे जिले का मिलिंग कार्य पूरी तरह ठप हो जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और जिला प्रशासन की होगी।
