कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त,आम जनता के बाद अब न्याय और सुरक्षा के रखवाले ही नहीं रहे सुरक्षित
Junaid Khan - शहडोल। जिले में अपराधियों और चोर-उच्चकों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब खाकी और प्रशासन का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। संयुक्त कलेक्ट्रेट जैसे अति-सुरक्षित माने जाने वाले परिसर में, जहाँ जिले के तमाम आला अधिकारी बैठते हैं, वहीं घुसकर शातिर चोरों ने सीधे एसपी दफ्तर की छत पर लगे एसी आउटर से तांबे की पाइप पार कर दी। चोरों की दुस्साहस यहीं नहीं रुका उन्होंने संयुक्त कलेक्ट्रेट में संचालित अन्य शासकीय कार्यालयों समेत पास ही स्थित जिला पंचायत भवन के भी लगभग 7 एसी आउटरों को निशाना बनाकर तांबे की पाइपें उखाड़ लीं। जिस परिसर में चौबीसों घंटे सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस का पहरा और सीसीटीवी कैमरों का ढोल पीटा जाता है, वहाँ से यदि पुलिस कप्तान के ही दफ्तर की संपत्ति सुरक्षित नहीं है, तो इससे जिले की कानून-व्यवस्था का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। यह सीधे तौर पर जिला प्रशासन और पुलिस महकमे के गश्त दावों पर करारा तमाचा है।
अधिकारियों की अकर्मण्यता से बढ़े अपराधियों के हौसले। स्थानीय नागरिकों का साफ तौर पर कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब शहर में इस तरह की घटना घटी है। इससे कुछ माह पूर्व पुराना बस स्टैंड स्थित शहीद भगत सिंह कॉम्प्लेक्स में भी चोरों ने इसी अंदाज में एसी आउटरों से तांबे की पाइपें चोरी की थीं। परंतु, तत्कालीन समय में पुलिस की नाकामी और सुस्त रवैये को देखते हुए लोगों ने एफआईआर दर्ज कराना ही मुनासिब नहीं समझा, क्योंकि आम जनता जानती थी कि पुलिस से चोर तो पकड़े जाने से रहे, उलटे थाने के चक्कर ही काटने पड़ेंगे। जिम्मेदारों की इसी लापरवाही और शिथिल कार्यप्रणाली का नतीजा है कि आज चोरों के हौसले इतने बढ़ चुके हैं कि वे आम सड़कों से निकलकर अब सीधे जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक केंद्र कलेक्ट्रेट तक जा पहुँचे हैं। आखिर शहर में रात के समय गश्त करने वाली पुलिस गाड़ियाँ क्या सिर्फ दिखावे के लिए सायरन बजाती हैं? इतने कड़े सुरक्षा चक्र के बावजूद चोर आसानी से तांबे की पाइपें काटकर चंपत हो गए और सुरक्षाकर्मी सोते ही रह गए। जज के घर चोरी के 11 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली। अपराधियों का यह आतंक केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं है। जिले की ब्यौहारी तहसील में भी सुरक्षा तंत्र पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। बीते 12 सितंबर की रात अज्ञात चोरों ने निर्भीक होकर सीधे न्यायिक मजिस्ट्रेट अवनीश चौबे के शासकीय आवास पर धावा बोला और लाखों रुपये के माल-अस्बाब पर हाथ साफ कर दिया। हद तो तब हो गई जब वारदात का आरोपी सीसीटीवी फुटेज में कैद होने के बावजूद, घटना के पूरे 11 दिन बीत जाने के बाद भी ब्यौहारी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। जब न्यायपालिका के जजों और जिले के एसपी का अपना दफ्तर व मकान ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की जान-माल की हिफाजत का दावा करना हास्यास्पद लगता है। यह घटनाक्रम शासन, पुलिस प्रशासन और स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों की नाकामी को सरेआम बेनकाब करता है। अब देखना यह है कि इस कड़े सवालिया निशान के बाद आला अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या फिर जिला अपराधियों की गिरफ्त में ऐसे ही पिसता रहेगा।
