12 दिन बीते, तीन जिंदगियां गायब: खाकी की ढिलाई पर उठे सवाल, क्या सो रहा है प्रशासन?

गोरतरा से एक ही घर के तीन मासूमों का सुराग न मिलने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गहराया आक्रोश।


Junaid Khan - शहडोल। संभाग मुख्यालय के कोतवाली थाना अंतर्गत गोरतरा गांव से एक ही परिवार के तीन चिरागों के अचानक गायब हो जाने की सनसनीखेज घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। 20 वर्षीया युवती अपने दो मासूम नाबालिग भाइयों को लेकर संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई है, लेकिन अचरज और घोर लापरवाही की बात यह है कि घटना के पूरे 12 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ पूरी तरह खाली हैं। जहां एक ओर रोते-बिलखते परिजन दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार प्रशासनिक अमला और कानून-व्यवस्था के नुमाइंदे केवल कागजी घोड़े दौड़ाने में मस्त हैं। पीड़िता के पिता और मां, जो एक निजी अस्पताल में साफ-सफाई का काम कर अपना व अपने बच्चों का पेट पालते हैं, 15 अक्टूबर को जब काम से घर लौटे तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। घर से गायब बच्चों की तलाश में असहाय परिजनों ने अपने स्तर पर रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के इलाकों में दिन-रात एक कर दिया, पर निराशा ही हाथ लगी।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि युवती अपने दोनों छोटे भाइयों को नौरोजाबाद और पाली जाने की बात कहकर निकली थी, जिसके बाद से ही तीनों का कोई सुराग नहीं मिल सका है। लाचार परिजनों ने बिना समय गंवाए कोतवाली थाने पहुंचकर पुलिस को स्पष्ट सूचना दी और गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया, लेकिन 12 दिन बीत जाने के बाद भी खाकी वर्दीधारी केवल लकीर पीटते नजर आ रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि संभाग मुख्यालय में कानून व्यवस्था बनाए रखने के बड़े-बड़े दावे करने वाली पुलिस और प्रदेश सरकार की सुरक्षा एजेंसियां आखिर कहां सो रही हैं? इतनी बड़ी घटना के बाद भी पुलिस सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और साइबर सेल का सहारा लेकर ठोस कार्रवाई करने में नाकाम क्यों साबित हो रही है?

एक तरफ तो प्रदेश सरकार बेटियों की सुरक्षा और बाल संरक्षण के नाम पर बड़े-बड़े पोस्टर-बैनर लगाकर अपनी पीठ थपथपाने में पीछे नहीं हटती, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर जिम्मेदार पुलिस अधिकारी इस गंभीर मामले में मूकदर्शक बने बैठे हैं। खाकी की इस सुस्ती और घोर प्रशासनिक ढिलाई के कारण पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और वे किसी अनहोनी की आशंका से थर-थर कांप रहे हैं। स्थानीय जनता और प्रबुद्ध नागरिकों में भी पुलिस प्रशासन के इस रवैये को लेकर भारी जनआक्रोश पनप रहा है। यदि समय रहते जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों ने अपनी कार्यशैली में सुधार लाकर तीनों लापता बच्चों को सकुशल बरामद नहीं किया, तो सरकार की 'सुरक्षित मध्य प्रदेश' की छवि पर यह एक बड़ा धब्बा साबित होगा और परिजनों के साथ पूरा इलाका सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।

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