प्रोटोकॉल का हवाला देने पर पुलिसकर्मी से अभद्रता,उठने लगे अनुशासन पर सवाल
Junaid Khan - शहडोल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शहडोल आगमन के दौरान जमुई स्थित हेलीपैड पर वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को तार-तार करने की कोशिश और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ हुज्जतबाजी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सख्त दिशा-निर्देश और अधिकृत प्रवेश सूची (Pass List) जारी की गई थी, जिसके तहत केवल चिन्हित व्यक्तियों को ही वीआईपी जोन में जाने की अनुमति थी। हालांकि, मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उतरते ही सत्ता के नशे में चूर कुछ स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तय प्रोटोकॉल को ठेंगा दिखाते हुए जबरन अंदर दाखिल होने की कोशिश की। जब मौके पर तैनात सतर्क पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा कारणों और सूची में नाम न होने का हवाला देकर उन्हें रोका, तो कार्यकर्ताओं ने अपनी गलती मानने के बजाय ऑन-ड्यूटी जवान से ही बहसबाजी और नोकझोंक शुरू कर दी। यह विवाद तब और गरमा गया जब भाजपा कार्यकर्ता व कुबरा सरपंच शेषमणि पाल बिना अधिकृत पास के हेलीपैड क्षेत्र में जाने पर अड़ गए। सुरक्षा में तैनात जवान ने स्पष्ट रूप से नियमों का पालन करते हुए उन्हें रोका कि सुरक्षा सूची में नाम के बिना प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित है। अगर पुलिस जवान उस वक्त दबाव में आकर बिना जांच किसी को भी अंदर जाने देते, तो यह मुख्यमंत्री की वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ी चूक हो सकती थी। पुलिसकर्मी की कोई व्यक्तिगत रंजिश नहीं थी, बल्कि वह केवल राज्य के मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए दिए गए सख्त प्रशासनिक आदेशों और फर्ज का ईमानदारी से पालन कर रहा था। बावजूद इसके, सत्ताधारी दल के नेताओं ने मौके की गंभीरता को समझे बिना कार्यक्रम समाप्ति और मुख्यमंत्री के रवाना होने तक विवाद की स्थिति बनाए रखी। हैरानी की बात यह है कि नियम तोड़ने वाले कार्यकर्ताओं ने उल्टा क्षेत्रीय विधायक के सामने जाकर अपनी मनगढ़ंत व्यथा सुनाई और अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे निष्पक्ष पुलिसकर्मी पर ही कार्रवाई की मांग कर डाली। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब क्षेत्र की प्रबुद्ध जनता और प्रशासनिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सत्ता की धौंस दिखाकर सुरक्षा नियमों को तोड़ना जायज है? पुलिस रक्षक है और यदि वह अपने फर्ज पर अडिग रहकर कानून का पालन करा रही है, तो उस पर दबाव बनाना सर्वथा अनुचित है। जनचर्चा है कि इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए स्थानीय विधायक, भाजपा जिलाध्यक्ष और स्वयं मुख्यमंत्री को अपनी पार्टी के ऐसे अनुशासनहीन कार्यकर्ताओं पर कड़ा एक्शन लेना चाहिए, ताकि अपनी जान जोखिम में डालकर वीआईपी ड्यूटी करने वाले पुलिस जवानों का मनोबल न टूटे।
