संस्कृति व आस्था की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय बजरंग दल मैदान में,गरबा पंडालों में अमर्यादित प्रवेश और देवी-देवताओं वाले पटाखों पर रोक की मांग

पुलिस-प्रशासन को सौंपा ज्ञापन,गरबा आयोजनों में शालीन वेशभूषा, पहचान सत्यापन तथा गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने व पटाखों पर बने देवी-देवताओं के चित्रों पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की उठी जोरदार मांग


Junaid khan - शहडोल। आगामी नवरात्रि और दीपावली पर्वों के पावन अवसर पर हिंदू धर्म की सांस्कृतिक मर्यादा, पवित्रता और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद एवं राष्ट्रीय बजरंग दल (जिला शहडोल) ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए बिगुल फूंक दिया है। संगठन ने जिले में धार्मिक आस्था और परंपराओं के सम्मान की रक्षा हेतु मोर्चा संभालते हुए जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा है। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि यदि प्रशासन ने समय रहते गरबा पंडालों और बाजारों में कड़े सुरक्षा व नियमन के इंतजाम नहीं किए, तो जनभावनाओं को आघात पहुंचेगा। संगठन के पदाधिकारियों ने प्रशासन की ढिलाई पर कड़ा विरोध जताते हुए मांग की है कि त्योहारों की आड़ में धार्मिक आस्था से खिलवाड़ करने वाली गतिविधियों पर तुरंत अंकुश लगाया जाए। राष्ट्रीय बजरंग दल के जिलाध्यक्ष आकाश दीप साहू एवं अन्य कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर साल पर्वों के दौरान पंडालों में अवांछित तत्वों का प्रवेश और बाजारों में देवी-देवताओं के चित्रों वाले पटाखों की अवैध बिक्री होती है, जिस पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान नहीं जाता। संगठन ने मांग उठाई है कि जिले के समस्त गरबा व नवरात्रि आयोजनों के लिए शालीन वेशभूषा, अनुशासन, पहचान पत्र सत्यापन और महिलाओं की सुरक्षा के पुख्ता दिशानिर्देश जारी किए जाएं। इसके साथ ही, गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को पूर्णतः वर्जित करने हेतु विधिक प्रावधानों के तहत गाइडलाइन बनाने तथा दीपावली पर बिकने वाले उन पटाखों के निर्माण, बिक्री व उपयोग पर कड़ा प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है, जिन पर देवी-देवताओं या धार्मिक प्रतीकों के चित्र छपे होते हैं। हिंदू समाज की संस्कृति और मान-मर्यादा की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने वाले अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल के इस जनहितैषी और साहसिक कदम की पूरे जिले में चौतरफा प्रशंसा हो रही है। आम नागरिकों और सनातन धर्मावलंबियों ने संगठन के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक आस्थाओं की रक्षा और बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए ऐसा सजग नेतृत्व बेहद जरूरी है। वहीं दूसरी ओर, इस ज्ञापन के बाद अब गेंद पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों के पाले में है। देखना यह होगा कि जिला प्रशासन, थाना प्रभारी और संबंधित अधिकारी इन गंभीर मुद्दों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं या फिर केवल कागजी आश्वासनों तक ही सीमित रहते हैं।

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