चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे कार्यकर्ता,देर रात कोतवाली से हुए रिहा; सरकार की इस तानाशाही कार्रवाई से कार्यकर्ताओं में आक्रोश,,,
Junaid khan- शहडोल। लोकतंत्र में जायज मांग और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर एक बार फिर प्रशासनिक हनक और सरकारी तंत्र की तानाशाही का कड़ा पहरा देखने को मिला है। शहडोल में पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने जिस मुस्तैदी और अति-सक्रियता का परिचय देते हुए दिल्ली जा रहे युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रेलवे स्टेशन पर रोका, उससे साफ जाहिर होता है कि सत्ता में बैठे आकाओं को जनता और विपक्ष की उठती आवाज से कितना खौफ है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित विशाल एवं प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों को शहडोल रेलवे स्टेशन से पुलिस ने जबरन गिरफ्तार कर लिया। अपनी लोकतांत्रिक आवाज को दिल्ली तक पहुंचाने जा रहे इन युवाओं के खिलाफ जिस प्रकार पुलिस बल तैनात कर घेराबंदी की गई, उसने प्रशासनिक कार्यशैली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस की इस मनमानी कार्रवाई के तहत युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुपम गौतम, प्रदेश सचिव अभिषेक शुक्ला, जिला महासचिव शेख आबिद, विधानसभा जयसिंहनगर के अध्यक्ष शेख साजिल तथा सत्यम प्रजापति को स्टेशन परिसर से हिरासत में लिया गया। निर्दोष कार्यकर्ताओं पर कानूनी शिकंजा कसते हुए पुलिस उन्हें सीधे सिटी कोतवाली ले गई, जहां घंटों तक बिठाए रखने के बाद देर रात उन्हें रिहा किया गया। इस पूरी कार्रवाई को लेकर इलाके के जागरूक नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुलिस-प्रशासनिक तंत्र अब निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय केवल सत्ताधारी सरकार के इशारों पर विपक्ष की आवाज को दबाने का औजार बन चुका है। जिम्मेदार उच्च प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस महकमे के आला अफसरों की इस पक्षपातपूर्ण भूमिका से आमजन में गहरा असंतोष है, क्योंकि जब बात विपक्ष के लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन की आती है, तो पुलिस तंत्र पलक झपकते ही दमनकारी रवैया अपना लेता है।
प्रशासन की इस बर्बर और दमनकारी नीति के बावजूद युवा कांग्रेस के हौसले पस्त होने का नाम नहीं ले रहे हैं। रिहाई के बाद मीडिया से बात करते हुए युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुपम गौतम ने सख्त लहजे में सरकार और प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि "युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता जननायक राहुल गांधी के बब्बर शेर हैं, जिन्हें जेल, लाठी या पुलिसिया दमन के दम पर डराया नहीं जा सकता। यह दमनकारी सरकार चाहे जितने हथकंडे अपना ले, हमारी उठती आवाज को दबा नहीं पाएगी।" वहीं निष्पक्ष हलकों में भी अब यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि क्या अब देश में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से यात्रा करना भी अपराध हो गया है? जिम्मेदार अधिकारियों की यह हड़बड़ी और अति-उत्साह भरी कार्रवाई सीधे तौर पर यह बयां करती है कि सत्ता के दबाव में काम कर रहा प्रशासनिक अमला संवैधानिक अधिकारों को कुचलने पर आमादा है, लेकिन इस दमन के खिलाफ जनता और युवा और अधिक मजबूती से सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।
