सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल,नगर पालिका की कार्रवाई के बाद बढ़ा पारिवारिक विवाद, पीड़िता ने दर्ज कराई एनसीआर
Junaid Khan - शहडोल। जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत मुख्य बस स्टैंड परिसर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। नगर पालिका प्रशासन द्वारा चाय की गुमटी हटाए जाने के तुरंत बाद ही दो पक्षों के बीच सरेराह जमकर विवाद, गाली-गलौज और मारपीट हो गई। सबसे चौकाने वाली बात यह रही कि पूरी घटना स्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों की आंखों के सामने घटित हुई, लेकिन स्थिति को वक्त रहते नियंत्रित करने में जिम्मेदार असफल साबित हुए। घटना का एक लाइव वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद दोनों पक्ष आपस में झूमाझपटी करते साफ नजर आ रहे हैं। इस घटना ने सरेबाजार कानून-व्यवस्था और पुलिस के इकबाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अतिक्रमण कार्रवाई के बाद भड़का पुराना पारिवारिक विवाद प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता पूजा गुप्ता का अपने ही रिश्तेदारों के साथ चाय की गुमटी को लेकर काफी समय से विवाद चला आ रहा था। बीते 26 अक्टूबर को नगर पालिका के अमले ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बस स्टैंड स्थित उक्त विवादित चाय की गुमटी को हटा दिया था। इसके ठीक बाद, दोपहर लगभग 12 बजे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि इस दौरान विपक्षी पक्ष ने उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार करते हुए जान से मारने की धमकियां दीं। नगर पालिका द्वारा अतिक्रमण तो हटा दिया गया, लेकिन इसके बाद उपजने वाले संभावित विवाद को लेकर न तो प्रशासनिक अधिकारियों ने सतर्कता दिखाई और न ही स्थानीय पुलिस ने मुस्तैदी बरती, जिससे पीड़िता और उनका परिवार बेहद खौफ और परेशानी के साए में जीने को मजबूर है। कानून-व्यवस्था पर सवाल, सख्त कार्रवाई की मांग। घटना के बाद पीड़िता की शिकायत पर सोहागपुर थाना पुलिस ने औपचारिक रूप से एनसीआर (Non-Cognizable Report) दर्ज कर मामले को जांच में लिया है। हालांकि, सरेराह हुई इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग में पुलिस व निकाय प्रशासन की ढचर-ढचर कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि जब निकाय प्रशासन ऐसी कोई कार्रवाई करता है, तो वहां सुरक्षा और शांति बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस प्रशासन की होती है। खाकी की मौजूदगी में दबंगई और धक्का-मुक्की होना कहीं न कहीं संबंधित अधिकारियों की सुस्ती और ढिलाई को दर्शाता है। फिलहाल पीड़िता ने जिम्मेदार अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
