शहडोल में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई

गर्भवती महिलाओं की जांच में लापरवाही पर 43 एएनएम का वेतन रोका!

कलेक्टर की नाराजगी के बाद कार्रवाई, सात दिन का वेतन रोकने का आदेश जारी


Junaid Khan - शहडोल। जिले में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गर्भवती महिलाओं की जांच, पंजीयन और प्रसव पूर्व उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संस्थाओं में भर्ती कराने से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में कथित लापरवाही के मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिंहपुर के मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी ने 43 एएनएम का सात दिन का वेतन रोकने के आदेश जारी किए हैं। 25 सितंबर 2026 को जारी इन आदेशों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचने की स्थिति है।

गर्भवती महिलाओं की निगरानी में चूक,कलेक्टर तक पहुंचा मामला

जारी आदेशों के अनुसार, संबंधित एएनएम को गर्भवती महिलाओं की जांच, लक्ष्य के अनुरूप पंजीयन तथा प्रसव पूर्व उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संस्थाओं में भर्ती कराकर अनमोल पोर्टल पर जानकारी अपडेट करने की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि इस कार्य में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती गई। मामला जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में समीक्षा के दौरान सामने आया, जहां कलेक्टर द्वारा नाराजगी व्यक्त किए जाने और संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए जाने का उल्लेख आदेश में किया गया है।

एक आदेश में आठ, दूसरे में 35 एएनएम पर कार्रवाई

जारी के मुताबिक,एक आदेश में आठ एएनएम तथा दूसरे आदेश में 35 एएनएम के नाम शामिल हैं। इस तरह कुल 43 एएनएम का सात दिन का वेतन आहरण रोकने की कार्रवाई की गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित कार्य पूर्ण होने के बाद ही रोकी गई राशि का भुगतान किया जाएगा।

सवाल यह है कि निगरानी व्यवस्था आखिर कहां विफल हुई?

गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और हाई रिस्क मामलों की पहचान केवल कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि मां और गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील दायित्व है। यदि निर्धारित लक्ष्य के अनुसार काम नहीं हुआ, तो इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है। 

वेतन रोकना काफी या जवाबदेही की होगी व्यापक जांच?

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया या नहीं, काम में कमी के वास्तविक कारणों की जांच हुई या नहीं और गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए। सात दिन का वेतन रोकने की कार्रवाई के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी गर्भवती महिला की जांच, जोखिम की पहचान या समय पर उपचार में कोई चूक न हो। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है। अब सवाल केवल वेतन रोकने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।

कार्यस्थल पर देरी से पहुंचने वाली एएनएम, स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल 

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभालने वाली एएनएम के कार्यस्थल पर देरी से पहुंचने की शिकायतें समय समय पर सामने आने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। समय पर उपस्थित नहीं होने से गर्भवती महिलाओं की जांच, पंजीयन और टीकाकरण जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में ग्रामीणों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिलना चुनौती बन सकता है। विभागीय अधिकारियों को संबंधित उप स्वास्थ्य केंद्रों की उपस्थिति पंजिका, निरीक्षण रिकॉर्ड और वास्तविक कार्यप्रणाली की जांच करनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को जवाबदेही तय कर समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करनी चाहिए।   

इनका कहना है।

संबंधित ए.एन.एमों द्वारा अनमोल पोर्टल पर समय पर फीडिंग ना करने,टीकाकरण और एन.सी.डी के कार्यों में लापरवाही ,और समय से अपने कार्यस्थल में उपस्थित ना होने के चलते, पहले नोटिस जारी किया गया,और अपने कार्यों में सुधार हेतु कहा गया। इनके द्वारा कार्यों में सुधार ना लाने के चलते इनके 07 दिवस का वेतन रोका गया है।कार्य में सुधार होते ही संबंधितों का रुका हुआ वेतन रिलीज कर दिया जाएगा।

डॉक्टर पुष्पराज सिंह

विकासखंड चिकित्सा अधिकारी,विकासखंड सिंहपुर

अपने कार्य में गंभीर लापरवाही के चलते ए.एन.एमों का 07 दिवस का वेतन रोका गया है। इनके कार्य में सुधार होते ही,बी.एम.ओ से प्राप्त अपडेट के आधार पर रुका हुआ 07 दिवस का वेतन आहरण कर दिया जाएगा।

डॉक्टर. राजेश मिश्रा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी शहडोल

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