शहर में सीना तानकर पनप रहा अवैध निर्माण का काला कारोबार: अनुमति से 03 गुना ज्यादा निर्माण,रोकने पहुंचे बुजुर्गों से बदसलूकी और गुंडई,फरियादी ने लगाई निष्पक्ष जांच की गुहार
Junaid Khan - शहडोल। जिले के नवागत एवं तेजतर्रार कलेक्टर द्वारा भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए दी जा रही सख्त हिदायतों के बावजूद, शहडोल नगरपालिका परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। प्रशासनिक चाबुक के ढीले पड़ते ही शहर में अवैध निर्माण और कब्जे का काला कारोबार एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। वार्ड क्रमांक 26 (इन्द्रा चौक / देवौता अस्पताल के पीछे वार्ड 28) क्षेत्र में एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां नियम-कायदों को ताक पर रखकर परमिशन की तय सीमा से लगभग 3 गुना अधिक भूमि पर धड़ल्ले से अवैध निर्माण कराया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जब स्थानीय नागरिक और बुजुर्ग महिलाएं इस अवैध अतिक्रमण और रास्ते में फैलाए जा रहे सामान-मशीनों का विरोध करने पहुंचते हैं, तो निर्माणकर्ता और उनके ठेकेदार ना केवल उल्टी-सीधी बातें कर अभद्रता पर उतारू हो जाते हैं, बल्कि खुलेआम दबंगई और गुंडई दिखाकर लोगों को धमकाते हैं। प्राप्त जानकारी और दस्तावेजों के अनुसार, शिकायतकर्ता विशाल मंचबानी ने इस समानांतर चल रहे अवैध कारोबार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। पीड़ित द्वारा सीएम हेल्पलाइन (शिकायत क्र. 41300248) के साथ-साथ मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) शहडोल के समक्ष लिखित आवेदन प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि गौरव माधवानी (पिता विवेकानंद माधवानी) एवं उनके परिजनों (जय व विजय/विषय माधवानी) द्वारा स्वीकृत नक्शे और परमिशन की धज्जियां उड़ाते हुए तीन गुना ज्यादा क्षेत्र में अवैध निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य का मलबा और भारी सामान-मशीनें आम रास्ते पर बिखेर दी गई हैं, जिससे राहगीरों का निकलना दूभर हो गया है। जब इस समस्या पर सामान हटाने का आग्रह किया जाता है, तो उनके ठेकेदार (सुनाल गुप्ता) व अन्य द्वारा छत पर से चढ़कर जाने की बात कहकर राहगीरों और बुजुर्ग महिलाओं से अभद्र व्यवहार किया जाता है। फरियादी का कहना है कि वे किसी पर झूठा आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि प्रशासन से केवल भूमि और निर्माण के सीमांकन की गहन व निष्पक्ष जांच कराने का निवेदन कर रहे हैं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। इस पूरे घटनाक्रम ने शहडोल नगरपालिका के मैदानी अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या नगर पालिका के संबंधित वार्ड निरीक्षक और जांच अधिकारियों की शह के बिना इतना बड़ा अवैध निर्माण संभव है? जब शिकायतकर्ता द्वारा बार-बार विभाग को सूचित किया गया, तब भी समय रहते कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जनचर्चा है कि कलेक्टर महोदय की लाख सख्ती के बावजूद उनके ही मातहत विभागों में बैठे कुछ भ्रष्टाचारी कर्मचारी और अधिकारी अवैध निर्माणकर्ताओं से सांठगांठ कर फाइलों को दबाने में लगे हुए हैं। सीएम हेल्पलाइन में मामला L1 अधिकारी के पास लंबित होने के बाद अब शहरवासियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भ्रष्ट तंत्र पर प्रशासन का बुलडोजर और चाबुक चलेगा या फिर जांच के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? फरियादी और स्थानीय नागरिकों ने मामले में तत्काल अवैध निर्माण रुकवाकर निष्पक्ष जांच एवं आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
