बांधवगढ़ के अस्तित्व पर मंडराया संकट,कोर जोन में खनन की सुगबुगाहट से भड़का जनआक्रोश,मंत्रालय से शिकायत के बाद अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी-अधिवक्ता,कार्तिक समतानी

पर्यावरण संरक्षण की अनदेखी पर प्रशासन व जिम्मेदार विभागों को घेरा, हाईकोर्ट में PIL दायर करने की चेतावनी


Junaid Khan - शहडोल। उमरिया। विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अति-संवेदनशील 'कोर जोन' में प्रस्तावित एवं जारी कोयला खनन गतिविधियों को लेकर प्रशासनिक संवेदनहीनता और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। बाघों, तेंदुओं और जंगली हाथियों के सुरक्षित गढ़ माने जाने वाले इस प्राकृतिक आवास में भारी मशीनरी और खनन गतिविधियों की अनुमति देने की सुगबुगाहट ने पर्यावरण प्रेमियों व जन-प्रतिनिधियों को झकझोर कर रख दिया है। विकास के नाम पर वन्यजीवों के पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को रोकने के लिए शहडोल के वरिष्ठ अधिवक्ता कुमार कार्तिकेय समतानी ने मोर्चा संभालते हुए भारत सरकार के कोयला मंत्रालय को एक कड़ा शिकायत पत्र सौंपा है। पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि जिम्मेदार महकमों और शासन-प्रशासन द्वारा इस पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई, तो मामले को सीधे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से उठाया जाएगा। अधिवक्ता समतानी द्वारा कोयला मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) तथा मध्य प्रदेश शासन के वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों (अपर मुख्य सचिव व पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ) को भेजी गई शिकायत में क्षेत्र के प्राकृतिक संतुलन पर मंडरा रहे खतरों को रेखांकित किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि कोर जोन जैसे आरक्षित वन्यजीव क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही और खुदाई से न केवल जंगल का विखंडन होगा, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की भयावह स्थितियां निर्मित होंगी। इसके साथ ही स्थानीय जलस्रोतों के दूषित होने, भू-जल स्तर गिरने और जैव-विविधता के स्थायी विनाश की गंभीर आशंका जताई गई है। विधि विशेषज्ञों और सजग नागरिकों के इस कदम की सराहना की जा रही है, क्योंकि यह जनहितैषी पहल सोए हुए शासन-प्रशासन को जगाने और प्राकृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक साहसिक प्रयास साबित हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने जिम्मेदार प्रशासनिक तंत्र, खान विभाग और वन प्रबंधन के रवैये पर भी कड़े प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं कि आखिर राष्ट्रीय पार्क के कोर जोन की संवेदनशीलता को ताक पर रखकर ऐसी खनन परियोजनाओं को समीक्षा के बिना आगे कैसे बढ़ने दिया जा रहा है? अधिवक्ता कुमार कार्तिकेय समतानी ने साफ तौर पर कहा है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना सरकार का प्राथमिक संवैधानिक दायित्व है। यदि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा समय रहते अंतरिम संरक्षणात्मक कदम नहीं उठाए जाते और खनन गतिविधियों की निष्पक्ष समीक्षा नहीं की जाती, तो मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर इस पर वैधानिक रोक लगाने की मांग की जाएगी। आगामी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य और बांधवगढ़ की अनमोल प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए उठाई गई यह आवाज अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेती दिख रही है।

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