बैगा आदिवासियों से फर्जीवाड़े का महाघोटाला,कियोस्क संचालक और माइक्रोफाइनेंस कंपनी की साठगांठ से लाखों का डाका, पुलिस की त्वरित FIR से जागा प्रशासन
Junaid Khan - शहडोल। जिले के सुहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम छतवई से बेहद सनसनीखेज और गंभीर मामला सामने आया है, जहां विकास की मुख्यधारा से दूर भोले-भाले आदिवासियों और बैगा परिवारों के भरोसे का खून कर दिया गया। बैंक खातों से पैसे निकालने के नाम पर धोखाधड़ी का जाल बिछाकर गरीब महिलाओं के नाम पर फर्जी तरीके से फाइनेंस कंपनियों से लाखों रुपए का लोन मंजूर करा लिया गया। इस बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ जब पीड़ित बैगा महिलाएं न्याय की गुहार लेकर पुलिस के पास पहुंचीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए। सुहागपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी कियोस्क संचालक और माइक्रोफाइनेंस कंपनी के जिम्मेदार कारिंदों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न संगीन धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस प्रशासन की इस त्वरित व सख्त कार्रवाई से जहां पीड़ित ग्रामीणों को इंसाफ की उम्मीद जगी है, वहीं इस गिरोह के पर्दाफाश से जिले के पूरे वित्तीय तंत्र में हड़कंप मच गया है। अंगूठा लगवाया, उम्र घटाई और डकार गए लाखों का कर्ज,पढ़िए ठगी का पूरा खेल। पूरा घटनाक्रम ग्राम छतवई का है, जहां सेंट्रल मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक का कियोस्क संचालित करने वाला ओमकार जायसवाल लंबे समय से ग्रामीणों के पैसे लेनदेन का काम देख रहा था। गांव की मुन्नी बाई बैगा (60 वर्ष) सहित दर्जनभर से अधिक अशिक्षित व निर्धन बैगा महिलाएं अपनी मजदूरी और शासकीय योजनाओं की राशि निकालने उसके कियोस्क केंद्र जाती थीं। आरोप है कि ओमकार जायसवाल ने महिलाओं की अनपढ़ता और लाचारी का फायदा उठाते हुए बार-बार अंगूठा लगवाया, उनके आधार कार्ड और फोटो हासिल किए। इसके बाद अवंति फाइनेंस कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ मिलकर एक संगठित आपराधिक साठगांठ रची गई। अधिक उम्र के कारण लोन न मिलने के नियम को दरकिनार करने के लिए शासकीय दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर महिलाओं की उम्र घटाई गई और प्रति महिला 30-30 हजार रुपए का लोन मंजूर करा लिया गया। हद तो तब हो गई जब लोन की राशि बेबस महिलाओं को देने के बजाय आरोपियों ने आपस में सांठगांठ कर अपने परिचितों व रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर ठिकाने लगा दी।
अज्ञात रिकवरी एजेंटों की दस्तक से खुला राज, पुलिस की नकेल से कसेगा शिकंजा। मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब दो महीने पहले फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंट अचानक छतवई गांव में किश्त वसूलने पहुंचे। जब मुन्नी बाई और अन्य महिलाओं ने बताया कि उन्होंने कभी किसी कंपनी से कोई कर्ज ही नहीं लिया, तब उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। गांव के सजग नागरिक प्रकाश पांडेय के सहयोग से जब पड़ताल की गई, तो पता चला कि छग्गन बाई, सोहतिया बैगा, बुट्टू, संपतिया, रमतिया, नोहरी बैगा, तेरसी बैगा सहित दर्जनों पीड़ित महिलाओं के नाम पर फर्जी तरीके से कुल 8 लाख 70 हजार रुपए का लोन निकालकर हड़प लिया गया है। ठगी का अहसास होते ही दर्जनों ग्रामीण सुहागपुर थाना पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। सुहागपुर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए धारा 318(4), 336(3), 340(2), 61(2) एवं 3(5) BNS के तहत अपराध क्रमांक 0436 दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। शासन और जिला प्रशासन का यह रुख साफ संदेश देता है कि गरीबों, आदिवासियों और असहाय नागरिकों के अधिकारों पर डाका डालने वाले चाहे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, वे कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएंगे।
