न्याय,प्रशासनिक मजबूती और जनहितैषी निर्णयों से शहडोल में सुशासन की नई मिसाल

नियमों की रक्षा और शासन की पारदर्शी नीतियों से सुदृढ़ हुई नगरीय व्यवस्था, उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद प्रशासनिक कार्य सुविधा हेतु राज्य सरकार ने जारी किए नए निर्देश 


Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश शासन की पारदर्शी नीतियों, माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के न्यायसंगत व ऐतिहासिक फैसलों और स्थानीय प्रशासनिक प्रतिबद्धता के चलते शहडोल जिले में कानून और नियमों की व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिली है। विगत दिनों मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी किए गए स्थानांतरण आदेश को निरस्त करते हुए माननीय उच्च न्यायालय (याचिका क्रमांक 19777/2026) ने सेवा नियमों के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण और नजीर पेश करने वाला निर्णय सुनाया था। उच्च न्यायालय की एकल पीठ (माननीय न्यायमूर्ति विशाल धगट) द्वारा पारित आदेश में मध्य प्रदेश नगरपालिका सेवा नियमों की स्पष्ट व्याख्या करते हुए यह स्थापित किया गया कि वर्ष 2014 में वर्ग-'ए' मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) के पद पर पदोन्नत अधिकारी को नियमों के विपरीत वर्ग-'बी' की नगरपालिका में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। इस ऐतिहासिक निर्णय के उपरांत श्रीमती आशा भंडारी (मेड़ा) ने पुनः शहडोल नगरपालिका में पदस्थ होकर प्रशासनिक निरंतरता और कानून के शासन को बल प्रदान किया, जिससे न केवल प्रशासनिक प्रतिष्ठा पुनर्स्थापित हुई बल्कि क्षेत्र के नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में शासन व न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और गहरा हुआ।

सुशासन की दिशा में राज्य सरकार का बड़ा कदम और प्रशासनिक पुनर्गठन न्यायालयीन आदेशों के सम्मान और स्थानीय नगरीय निकायों के सुचारू संचालन को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग (मंत्रालय, भोपाल) ने प्रशासनिक कार्य सुविधा की दृष्टि से एक और नया एवं महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। मध्य प्रदेश शासन के उप सचिव प्रमोद कुमार शुक्ला द्वारा हस्ताक्षरित आदेश (क्रमांक 4557/5896574/2026/18-1) के तहत स्थानांतरण नीति-2026 की कंडिका-8.2 के क्रम में प्रशासनिक संतुलन और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने हेतु श्रीमती आशा मेड़ा (भंडारी), मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद शहडोल को सहायक संचालक के पद पर संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल में पदस्थ किया गया है। राज्य सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय प्रशासनिक व्यवस्थाओं में कसावट लाने, विभागीय समन्वय को बेहतर बनाने और राज्यस्तरीय विकास योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन के दृष्टिकोण से बेहद सराहनीय और दूरगामी माना जा रहा है। सरकार और उच्च अधिकारियों की यह कार्यशैली दर्शाती है कि प्रशासनिक आवश्यकताओं और नियमों के परिपालन के बीच संतुलन स्थापित कर जनहित के कार्यों को सर्वोपरि रखा जा रहा है। अतिक्रमण, ठेकेदारी प्रथा पर लगाम और जनहितैषी कार्यों को मिली गति। शहडोल शहर में बीते दिनों प्रशासनिक सख्ती और नियमों के कड़ाई से पालन के कारण विकास कार्यों को एक नई दिशा मिली है। शहर में ठेकेदारों की मनमानी पर प्रभावी लगाम कसने, अवैध अतिक्रमणों को हटाने और सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित करने जैसे कड़े प्रशासनिक कदमों की क्षेत्र के नागरिकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सांसद व विधायकों ने खुलकर सराहना की है। स्थानीय जागरूक नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि राज्य सरकार की निष्पक्ष और स्पष्ट नीतियों के चलते अब शहडोल नगरपालिका क्षेत्र में चल रही विभिन्न विकास योजनाएं और अधिक पारदर्शिता व मजबूती के साथ आगे बढ़ेंगी। नियमों की रक्षा होने से स्थानीय निकायों के कार्यों में न केवल स्थायित्व आया है, बल्कि जनता को बुनियादी सुविधाएं समय पर और गुणवत्तापूर्वक उपलब्ध कराने की दिशा में भी बड़ा प्रशासनिक सुधार देखने को मिल रहा है। सुशासन और पारदर्शी कार्यप्रणाली का ही परिणाम है कि जिले में जनकल्याणकारी योजनाएं बिना किसी रुकावट के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रही हैं।

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