बांधवगढ़ में प्रशिक्षित खोजी श्वान अब प्रदेश के जंगलों में कर रहे वन्यजीव अपराधियों की तलाश

शिकारियों की गंध पहचानने से लेकर घटनास्थल के सुराग जुटाने में निभा रहे अहम भूमिका

छह डॉग स्क्वायड टीमों को दिया गया था उन्नत प्रशिक्षण


Junaid Khan - शहडोल। 02 नवंबर 2026 वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध शिकार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा आधुनिक तकनीकों के साथ प्रशिक्षित खोजी श्वानों की मदद ली जा रही है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला स्थित वन विद्यालय में प्रशिक्षित किए गए खोजी श्वान अब प्रदेश के अलग-अलग वन क्षेत्रों में वन्यजीव अपराधों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिकारियों की गंध पहचानने, घटनास्थल से सुराग तलाशने और संदिग्धों तक पहुंचने में इनकी विशेष क्षमता वन विभाग के लिए मददगार साबित हो रही है। जंगल के ये मौन प्रहरी वन्यजीव संरक्षण की लड़ाई में वन अमले के महत्वपूर्ण सहयोगी बनकर काम कर रहे हैं। सात दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स में दिया गया था उन्नत प्रशिक्षण बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला स्थित वन विद्यालय में जुलाई माह में सात दिवसीय श्वान दल रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किया गया था। इसमें प्रदेश के विभिन्न वन क्षेत्रों से आए डॉग स्क्वायड के श्वानों और उनके हैंडलरों को उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के दौरान श्वानों की खोज क्षमता, गंध पहचानने की दक्षता और कठिन परिस्थितियों में कार्य करने की क्षमता को परखा गया। इसका उद्देश्य श्वान दलों को अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में वन्यजीव अपराधों की जांच के लिए और अधिक दक्ष बनाना था।

छह डॉग स्क्वायड टीमों को किया गया तैयार 

प्रशिक्षण कार्यक्रम में रीवा, शहडोल, भोपाल, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (सागर), माधव राष्ट्रीय उद्यान और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की छह डॉग स्क्वायड टीमें शामिल हुईं। विशेषज्ञों की देखरेख में आयोजित प्रशिक्षण में श्वानों और उनके हैंडलरों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया। फील्ड अभ्यास और मॉक ड्रिल के माध्यम से वन्यजीव अपराधों की जांच के दौरान आने वाली चुनौतियों से निपटने का अभ्यास कराया गया।

प्रशिक्षण में ट्रैकिंग, अलग-अलग गंधों के बीच अंतर पहचानने, मानव शरीर की तलाश, घटनास्थल प्रबंधन, शारीरिक प्रशिक्षण, परेड तथा आदेशों का पालन करने जैसी तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया गया। इन अभ्यासों के माध्यम से श्वानों की कार्यक्षमता के साथ ही उनके हैंडलरों के साथ तालमेल को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया।

गंध के सहारे सुराग तक पहुंचते हैं खोजी श्वान 

जंगलों में वन्यजीवों के शिकार से जुड़ी घटनाओं की जांच कई बार चुनौतीपूर्ण होती है। दुर्गम रास्तों, घने जंगलों और सीमित साक्ष्यों के कारण आरोपियों तक पहुंचना आसान नहीं होता। ऐसी परिस्थितियों में प्रशिक्षित खोजी श्वान गंध के आधार पर सुराग तलाशने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करते हैं। घटनास्थल पर मौजूद गंध और अन्य उपलब्ध संकेतों के आधार पर ये जांच दल को संभावित दिशा में आगे बढ़ने में मदद करते हैं। हालांकि, श्वानों से प्राप्त संकेत अपने आप में अंतिम प्रमाण नहीं होते। वन विभाग और जांच एजेंसियां इन संकेतों को अन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर आगे की कार्रवाई करती हैं। इसके बावजूद वन्यजीव अपराधों की जांच में प्रशिक्षित श्वान दलों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।

हैंडलरों का प्रशिक्षण भी महत्वपूर्ण

खोजी श्वानों की दक्षता बनाए रखने में उनके हैंडलरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। हैंडलर को श्वान के व्यवहार, संकेतों और कार्य करने के तरीके को समझना पड़ता है। इसी उद्देश्य से रिफ्रेशर कोर्स में श्वानों के साथ उनके संचालकों को भी प्रशिक्षण दिया गया। फील्ड अभ्यास के दौरान दोनों के बीच समन्वय, आदेशों का पालन और विपरीत परिस्थितियों में काम करने की क्षमता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान वार्षिक समीक्षा और हैंडलरों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण शिविर भी आयोजित किए गए। नियमित समीक्षा के माध्यम से श्वान दलों के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है, जबकि स्वास्थ्य परीक्षण से उनकी कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद मिलती है।

दूसरे राज्यों में भी ली जाती है मदद

मध्यप्रदेश के खोजी श्वान दल वन्यजीव अपराधों की जांच के लिए विशेष पहचान रखते हैं। आवश्यकता पड़ने पर दूसरे प्रदेशों में होने वाली घटनाओं की जांच में भी इनकी सेवाएं ली जाती हैं। इससे इन श्वान दलों के प्रशिक्षण और व्यावहारिक दक्षता का महत्व सामने आता है। बांधवगढ़ में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स का उद्देश्य भी इसी क्षमता को लगातार बेहतर बनाना था। प्रशिक्षण के बाद विभिन्न वन क्षेत्रों में लौटे श्वान दल अपने निर्धारित कार्यक्षेत्रों में वन विभाग की जांच संबंधी गतिविधियों में सहयोग कर रहे हैं। बाघ, तेंदुआ सहित अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जंगलों में निगरानी के साथ-साथ शिकार जैसी घटनाओं की त्वरित जांच भी जरूरी है। ऐसे में प्रशिक्षित खोजी श्वान वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण संसाधन साबित हो रहे हैं। ये जंगलों में होने वाले अपराधों के सुराग तलाशने और वन्यजीवों के शिकार में शामिल लोगों तक पहुंचने की कार्रवाई को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

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