मानवता शर्मसार: अस्पताल का अमानवीय रवैया, दोबारा लाई गई एंबुलेंस

परिजनों की पीड़ा—पैसों के बिना शव तक ले जाने को तैयार नहीं थी एंबुलेंस


Junaid khan - शहडोल। जिले से में जबलपुर के लिए रेफर एक किशोर की मौत के बाद एंबुलेंस चालक ने पान उमरिया अस्पताल में ही छोड़ दिया। परिजन भटकते रहे और बाद उधार लेकर 10 हजार रुपए में वापस शव को गांव तक लाने के लिए तैयारी की। 12 वर्षीय बालक जो बम्हनी बुढ़ार का रहने वाला था, उसकी मौत के बाद लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। शहडोल मेडिकल कॉलेज से जबलपुर रेफर किए जाने पर जिस 108 एंबुलेंस से शव ले जाया जा रहा था, उसने ऑक्सीजन खत्म होने के कारण रास्ते में ही पान उमरिया के पास वाहन रोक दिया और शव वहीं छोड़कर चालक वापस आ गया। इससे बालक के परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। परिजनों के अनुसार 12 वर्षीय बच्चा पिछले दस दिनों से बीमार था और उसे झटके भी लग रहे थे। रविवार को मेडिकल कॉलेज शहडोल से जबलपुर के लिए रेफर किया गया था। जानकारी के अनुसार, अर्जन पाव पिता दलवीर धुम्माडोल गांव का वजन मात्र 20 किलो था और एनीमिक व कमजोर था। परिजनों ने बताया कि जबलपुर ले जाते समय रास्ते में ही एंबुलेंस की ऑक्सीजन खत्म हो गई। उसी दौरान बच्चे ने दम तोड़ दिया। इसके बाद 108 एंबुलेंस के चालक ने पान उमरिया के पास वाहन रोक दिया और शव वहीं छोड़कर चला गया। परिजन सूचना मिलते ही अलग से वाहन की तलाश में भटकते रहे। घटना की जानकारी मिलने पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजय अवस्थी ने सीएमएचओ से चर्चा की। बाद में एंबुलेंस वापस गई और शव लाया।

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