वायरल वीडियो से मचा बवाल: मुथूट मनी फाइनेंस पर गंभीर आरोप, पीड़ित बोला—न्याय नहीं मिला तो करेंगे कानूनी शिकायत
Junaid khan - शहडोल। बुढार चौक के समीप संचालित मुथूट मनी फाइनेंस कंपनी की स्थानीय शाखा इन दिनों एक वायरल वीडियो को लेकर विवादों में घिर गई है। गोल्ड लोन से जुड़ा यह मामला अब सिर्फ एक उपभोक्ता की शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद कंपनी की कार्यप्रणाली और उपभोक्ता अधिकारों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। उमरिया जिले के ग्राम चंदनिया निवासी अहिद खान ने शाखा प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पूरी बकाया राशि जमा करने के बावजूद उनका लोन क्लोज नहीं किया गया और गिरवी रखे गए सोने के आभूषण लौटाने से इनकार कर दिया गया। पीड़ित अहिद खान के अनुसार उन्होंने पारिवारिक जरूरतों के चलते 22 ग्राम और 14 ग्राम सोना गिरवी रखकर लगभग 2 लाख 80 हजार रुपये का गोल्ड लोन लिया था। 29 जनवरी को वे पूरी बकाया राशि लेकर शाखा पहुंचे, जहां कर्मचारियों ने उनसे लिखापढ़ी करवाई और अगले दिन आने को कहा। आरोप है कि 30 जनवरी को जब वे दोबारा शाखा पहुंचे तो शाखा प्रबंधक रवि शर्मा ने लोन क्लोज करने से साफ इनकार कर दिया। पीड़ित का कहना है कि उन्हें बताया गया कि महीने के अंतिम दिनों में लोन क्लोजिंग नहीं की जाती क्योंकि इससे शाखा के टारगेट पर असर पड़ता है। अहिद खान ने यह भी आरोप लगाया कि शाखा में उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और दो-तीन तारीख के बाद आने को कहा गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें अपने सोने के आभूषणों की तत्काल जरूरत थी, लेकिन दिनभर शाखा के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें कोई समाधान नहीं मिला। इस पूरे घटनाक्रम से आहत होकर परिवार ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। वीडियो में पीड़ित ने अन्य ग्राहकों को सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि गोल्ड लोन लेने से पहले कंपनी से लिखित में यह आश्वासन जरूर लें कि जरूरत पड़ने पर किसी भी दिन लोन क्लोज कर आभूषण वापस लिए जा सकेंगे। वायरल वीडियो के बाद न सिर्फ स्थानीय स्तर पर, बल्कि कंपनी की साख और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने लगे हैं। उपभोक्ता संगठनों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए जांच की मांग की है।
नियम-कानून क्या कहते हैं?
रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के लिए जारी गाइडलाइंस के अनुसार, यदि कोई ग्राहक गोल्ड लोन की पूरी बकाया राशि चुका देता है तो कंपनी बाध्य है कि वह बिना किसी अनावश्यक देरी के लोन क्लोज करे और गिरवी रखा गया सोना तुरंत वापस करे। किसी भी प्रकार से टारगेट, महीने की तारीख या आंतरिक नीति का हवाला देकर लोन क्लोजिंग से इनकार करना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत ऐसी स्थिति में ग्राहक जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके अलावा RBI के पास भी NBFC के खिलाफ शिकायत करने का प्रावधान है। पीड़ित अहिद खान ने स्पष्ट कहा है कि यदि उन्हें जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उपभोक्ता फोरम, जिला प्रशासन और रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया तक औपचारिक शिकायत करेंगे। वहीं, इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बड़े नाम वाली वित्तीय कंपनियां भी अपने टारगेट के दबाव में उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी कर रही हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां इस मामले में क्या कार्रवाई करती हैं।
