छुट्टी न मिलने से बिगड़ी तबीयत? 12वीं के छात्र की मौत पर बवाल

ज्ञानोदय हॉस्टल में अव्यवस्था के आरोप, परिजनों का फूटा गुस्सा; जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित 


Junaid khan - शहडोल। जिले के चर्चित आवासीय विद्यालय ज्ञानोदय हॉस्टल में 12वीं कक्षा के छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। आरोप है कि छात्र की तबीयत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन समय रहते न तो उसे छुट्टी दी गई और न ही समुचित इलाज की व्यवस्था की गई। अब मामले ने तूल पकड़ लिया है और जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, विचारपुर स्थित शासकीय ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत 12वीं के छात्र सुमित चौधरी, निवासी ग्राम पयारी जिला अनूपपुर, पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहा था। परिजनों का आरोप है कि छात्र ने कई बार तबीयत खराब होने की जानकारी दी, लेकिन हॉस्टल प्रबंधन ने गंभीरता नहीं दिखाई। बताया जा रहा है कि 16 फरवरी को अचानक हालत ज्यादा बिगड़ने पर छात्र के दादा उसे अपने साथ घर ले गए, जहां उपचार के दौरान 19 फरवरी को उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते छुट्टी देकर उचित इलाज की व्यवस्था कर दी जाती तो शायद आज सुमित जीवित होता। घटना के बाद गांव और शहर में शोक की लहर है। छात्र के परिजनों ने विद्यालय प्रबंधन पर लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हॉस्टल में स्वास्थ्य सुविधाएं नाममात्र की हैं और विद्यार्थियों की नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं होती। इस घटना ने आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। लोगों का कहना है कि आखिर बच्चों की जिम्मेदारी लेने वाले संस्थान इतनी बड़ी चूक कैसे कर सकते हैं? इधर, जनजातीय कार्य विभाग के संभागीय उपायुक्त जेपी यादव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए छात्र की मौत की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित किए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने छुट्टी न दिए जाने के आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन जांच की बात कह रहा है, लेकिन परिजनों का दर्द और आक्रोश कम नहीं हुआ है। सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक लापरवाही थी या सिस्टम की खामियों का परिणाम? जांच रिपोर्ट के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी, लेकिन इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गहरा प्रश्नचिह्न जरूर लगा दिया है।

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