फिजियोथेरेपी विभाग बदहाल: 22 में से 20 मशीनें बंद, मरीज और छात्र दोनों परेशान
Junaid khan - शहडोल। संभागीय मुख्यालय स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज के फिजियोथेरेपी विभाग की स्थिति चिंताजनक हो गई है। विभाग में स्थापित 22 मशीनों में से 20 मशीनें खराब पड़ी हैं, जिसके कारण मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। जानकारी के अनुसार विभाग में महीनों से मशीनें बंद पड़ी हैं। विभाग प्रमुख द्वारा डीन को कई बार पत्र लिखकर मशीनों की मरम्मत कराने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालात यह हैं कि केवल दो मशीनों के सहारे मरीजों का इलाज किया जा रहा है, जिससे रोजाना आने वाले मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
50 से अधिक मरीज रोज लौट रहे वापस फिजियोथेरेपी के लिए डॉक्टर नियमित रूप से मरीजों को पर्ची पर सलाह दे रहे हैं, लेकिन मशीनें खराब होने के कारण मरीजों को या तो अगली तारीख दी जा रही है या फिर निजी सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है। प्रतिदिन करीब 50 मरीज बिना उपचार के वापस लौट रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
55 विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर
विभाग में लगभग 55 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए मशीनों की आवश्यकता होती है। मशीनें बंद होने से छात्रों को केवल सैद्धांतिक पढ़ाई तक सीमित रहना पड़ रहा है, जिससे उनके प्रशिक्षण और भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
सीपेज और अव्यवस्था से हालात और बदतर
फिजियोथेरेपी कक्ष में साफ-सफाई और रखरखाव की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। जहां मशीनें रखी गई हैं, वहां पानी का सीपेज होने की बात सामने आई है, जिससे उपकरणों के और अधिक खराब होने की आशंका बनी हुई है।
प्रशासन का दावा जल्द सुधरेगी व्यवस्था
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि मशीनों की मरम्मत और सीपेज की समस्या को दूर करने की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही व्यवस्था को दुरुस्त कर लिया जाएगा। हालांकि, मरीजों और विद्यार्थियों का कहना है कि आश्वासनों से ज्यादा जरूरी है त्वरित कार्रवाई। स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवा में इस तरह की लापरवाही गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते मशीनों की मरम्मत और विभाग की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो इसका खामियाजा मरीजों और भविष्य के स्वास्थ्यकर्मियों दोनों को भुगतना पड़ेगा।
