सड़क पर दम तोड़ गया गरीब मरीज

एंबुलेंस न मिलने से पैदल घर लौट रहे बिन्नू बैगा की रेलवे फाटक के पास मौत 

आधी रात पुलिस गश्त ने संभाला मोर्चा, नंदी गौ सेवा धाम ने शव व परिजनों को पहुंचाया गांव खुलाड़


Junaid khan - शहडोल। जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। दो दिन पूर्व अस्वस्थ होने पर ग्राम खुलाड़ निवासी बिन्नू बैगा को जिला अस्पताल शहडोल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान हालत गंभीर होने पर मंगलवार रात करीब 3 बजे उन्हें मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि रेफर तो कर दिया गया, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को मेडिकल कॉलेज तक पहुंचाने के लिए कोई एंबुलेंस व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के पास निजी वाहन करने के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं थे।

मजबूरी में पैदल निकले, रास्ते में बैठा और फिर…

लाचार परिजन मरीज को सहारा देकर पैदल ही अपने गांव खुलाड़ की ओर ले जाने लगे। रेलवे फाटक के समीप पहुंचते-पहुंचते बिन्नू बैगा थककर बैठ गए। हालत बिगड़ने पर वे सड़क किनारे लेट गए और कुछ ही क्षणों में उनकी सांसें थम गईं।

सड़क पर हुई इस दर्दनाक मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं 

क्या रेफर किए गए मरीज को सुरक्षित पहुंचाना अस्पताल की जिम्मेदारी नहीं? गरीब मरीजों के लिए आपातकालीन परिवहन व्यवस्था क्यों नहीं? पुलिस गश्त पहुंची, समाजसेवियों ने निभाई जिम्मेदारी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस गश्त दल मौके पर पहुंचा। पूरी जानकारी लेने के बाद समाजसेवी रंजीत बसाक से संपर्क किया गया। सुबह करीब 4 बजे नंदी गौ सेवा धाम के सदस्य विकास जोतवानी ने मानवता का परिचय देते हुए शव और परिजनों को उनके गांव खुलाड़ पहुंचाने की व्यवस्था की।

जिम्मेदार कौन?

यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध होती, तो शायद एक गरीब की जान बचाई जा सकती थी। स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। गरीब मरीज की सड़क पर हुई मौत ने प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। अब देखना यह है कि जिम्मेदारी तय होती है या यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

Previous Post Next Post