योगशक्ति से मातृशक्ति कर रही हैं अपने आत्मशक्ति का विकास: योगाचार्य शिवाकान्त शुक्ला

योगशक्ति से मातृशक्ति कर रही हैं अपने आत्मशक्ति का विकास: योगाचार्य शिवाकान्त शुक्ला


Junaid khan - शहडोल। भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का रूप माना गया है, और आज के आधुनिक युग में योग वह माध्यम बन रहा है जिससे महिलाएं अपनी इस आंतरिक शक्ति को पुनः जागृत कर रही हैं। यह विचार प्रसिद्ध योगाचार्य शिवाकान्त शुक्ला ने शिवजी योग थैरेपी एवं वैलनेस सेंटर में आयोजित योग सत्र के दौरान व्यक्त किए।

आत्मबल का आधार है योग

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योगाचार्य शिवाकान्त शुक्ला ने कहा कि "मातृशक्ति योगशक्ति से अपने आत्मशक्ति का विकास कर रही हैं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा के मिलन का विज्ञान है। जब एक महिला योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाती है, तो न केवल उसका स्वास्थ्य सुधरता है, बल्कि उसके निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक दृढ़ता (आत्मशक्ति) में भी अभूतपूर्व वृद्धि होती है।

तनाव मुक्ति और सामंजस्य

योगाचार्य जी ने आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि आज की नारी घर और बाहर की दोहरी जिम्मेदारी निभा रही है। ऐसे में मानसिक तनाव और थकान होना स्वाभाविक है। योगशक्ति के माध्यम से महिलाएं अपने भीतर उस ऊर्जा का संचय कर रही हैं, जो उन्हें हर परिस्थिति में शांत और संतुलित रहने में मदद करती है। उन्होंने विशेष रूप से प्राणायाम और ध्यान के महत्व को रेखांकित किया, जो आत्मिक शांति के मुख्य स्तंभ हैं।

समाज निर्माण में भूमिका

योगाचार्य ने कहा कि एक सशक्त और स्वस्थ महिला ही एक सशक्त समाज की नींव रख सकती है। योग के जरिए जब मातृशक्ति का आत्मबल बढ़ता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। सत्र में उपस्थित मातृशक्तियों ने योगाचार्य के मार्गदर्शन में विभिन्न आसनों का अभ्यास किया और संकल्प लिया कि वे योग को अपने दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाएंगी। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में योग साधक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ और राष्ट्र कल्याण की प्रार्थना के साथ हुआ।

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