माहे रमज़ान की रूहानी शाम नूरी मस्जिद में इफ्तार-ए-आम, बरकत, मग़फ़िरत और वतन की अमन-ओ-आश्ती की दुआएँ
Junaid khan - शहडोल। धनपुरी मुक़द्दस माहे-रमज़ान की नूरानी फिज़ाओं में धनपुरी स्थित नूरी मस्जिद कमेटी ने मस्जिद ग्राउंड में भव्य इफ्तार-ए-आम का एहतमाम कर इबादत, इंसानियत और इत्तेहाद का शानदार पैग़ाम पेश किया। रोज़ेदार हज़रात की बड़ी तादाद ने शिरकत कर अल्लाह तआला की रज़ा के लिए दुआओं में हाथ उठाए अपने और अपने अहल-ए-ख़ाना के लिए बरकत, रोज़ी-रोज़गार में वुसअत, मग़फ़िरत और रहमत की इल्तिज़ा की, साथ ही मुल्क-ए-भारत में अमन-ओ-सुकून, आपसी भाईचारा और एकता की दुआ की। रमज़ान सब्र, तक़वा और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ का महीना है। दिनभर की सख़्त मशक़्क़त के बाद जब मग़रिब की अज़ान गूंजी, तो रोज़ेदारों ने खजूर और पानी से रोज़ा इफ्तार किया। उस लम्हे की रूहानियत ने पूरे माहौल को मोहब्बत और यकजहती की रौशनी से मुनव्वर कर दिया। कमेटी की जानिब से सादा मगर मुकम्मल इंतज़ामात किए गए थे, ताकि हर शख़्स इज़्ज़त और इत्मिनान के साथ इफ्तार कर सके। कमेटी के जिम्मेदारान ने बताया कि इफ्तार-ए-आम का मक़सद महज़ रोज़ा खोलना नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ना और समाज में हमदर्दी, एहतराम और तआवुन की रवायत को मज़बूत करना है। रमज़ान इंसान को दूसरों की तकलीफ़ का एहसास कराता है और ज़रूरतमंदों की मदद के लिए आमादा करता है। कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोगों की मौजूदगी ने इस रूहानी महफ़िल को और भी बामायना बना दिया। लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजन नफ़रत की दीवारों को गिराकर मोहब्बत की फिज़ा को फ़रोग़ देते हैं और गंगा-जमुनी तहज़ीब की ख़ूबसूरत तस्वीर पेश करते हैं। माहे-रमज़ान की इस बरकत-भरी शाम से यह पैग़ाम दूर तक गया कि इबादत के साथ-साथ इंसानियत की ख़िदमत ही अस्ल कामयाबी है। अल्लाह तआला से यही दुआ है कि वह इस नेक कोशिश को कबूल फरमाए, सबको बरकत, मग़फ़िरत और रहमत अता करे, और हमारे वतन में अमन-ओ-आश्ती, भाईचारा और इत्तेहाद कायम रखे।
