भ्रामक विज्ञापन का आरोप: बेडशीट ऑफर को लेकर ग्राहकों का फूटा गुस्सा, प्रशासन से जांच की मांग
रिटेल ब्रांड्स नियमों से ऊपर? ऑफर विवाद के साथ पार्किंग अराजकता पर भी उठे सवाल
Junaid khan - शहडोल। शहर के प्रमुख रिटेल स्टोर Vishal Mega Mart एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। सोमवार रात करीब 9:30 बजे शहडोल स्थित स्टोर में उस समय जबरदस्त हंगामा खड़ा हो गया, जब आकर्षक ऑफर के नाम पर खरीदारी करने पहुंचे दर्जनों ग्राहकों ने प्रबंधन पर खुली धोखाधड़ी का आरोप लगाया। “पे लेस ऑलवेज” जैसे लुभावने नारे के बीच ग्राहकों ने खुद को ठगा हुआ महसूस किया और देर रात तक स्टोर परिसर में बहस, नारेबाजी और तीखी कहासुनी का दौर चलता रहा। मामला “Home Beautiful Single Bedsheet (MRP ₹199)” पर लगे “Buy 4 Get 4 Free” ऑफर से जुड़ा बताया जा रहा है। स्टोर के अंदर बड़े-बड़े अक्षरों में यह ऑफर डिस्प्ले किया गया था। ऑफर बोर्ड देखकर ग्राहकों ने घंटों मशक्कत कर बेडशीट्स का चयन किया। लेकिन असली विवाद बिलिंग काउंटर पर शुरू हुआ,जहां ऑफर लागू करने की बजाय पूरी कीमत वसूलने की कोशिश की गई। ग्राहकों का आरोप है कि जब उन्होंने ऑफर बोर्ड का हवाला दिया, तो कर्मचारियों ने पहले “स्टॉक खत्म” होने की बात कही और फिर “तकनीकी समस्या” का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लिया। घटना के बाद ग्राहकों का गुस्सा फूट पड़ा। उपभोक्ताओं का कहना है कि यह सीधा-सीधा उनके अधिकारों का हनन है। घंटों समय और मेहनत के बाद यदि काउंटर पर ऑफर से मुकर जाया जाए तो यह मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं। कई ग्राहकों ने इसे “सुनियोजित मार्केटिंग जाल” करार दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्डिंग भी की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ समय के लिए बिलिंग प्रक्रिया भी बाधित हो गई और स्टोर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पीड़ित उपभोक्ताओं ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ऑफर लागू नहीं था या स्टॉक उपलब्ध नहीं था तो भ्रामक बोर्ड तुरंत हटाया जाना चाहिए था। यह मामला सीधे तौर पर Consumer Protection Act 2019 के तहत “भ्रामक विज्ञापन” और “अनुचित व्यापार प्रथा” की श्रेणी में आ सकता है। कानून के अनुसार उपभोक्ता को स्पष्ट, पारदर्शी और सही जानकारी देना व्यापारी की जिम्मेदारी है।
शहर के जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और नापतौल विभाग से तत्काल जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित प्रबंधन पर भारी जुर्माना लगाया जाए। साथ ही भविष्य में किसी भी ऑफर को लागू करने से पहले उसकी शर्तें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए जाएं। मामला सिर्फ ऑफर विवाद तक सीमित नहीं है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जब से शॉपिंग सेंटर खुला है, तब से यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। फुटपाथ और मुख्य मार्ग पर दोपहिया व चारपहिया वाहन खड़े किए जाते हैं, जिससे आम लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। नगर पालिका और यातायात पुलिस द्वारा कई बार नोटिस देने के बावजूद स्थिति में स्थायी सुधार नहीं हुआ।
लोगों का यह भी कहना है कि स्टोर में पार्किंग की पर्याप्त सुविधा होने के बावजूद वाहन सड़क पर खड़े कर दिए जाते हैं। सुरक्षा गार्ड की मौजूदगी के बावजूद यातायात नियमों की अनदेखी होती रहती है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या बड़े रिटेल ब्रांड्स नियमों से ऊपर हैं? कुछ ग्राहकों ने ऑनलाइन शॉपिंग से तुलना करते हुए कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर छूट, रिटर्न और रिफंड की प्रक्रिया अपेक्षाकृत पारदर्शी होती है। वहीं यहां डिस्प्ले में छूट दिखाकर बिलिंग के समय 18 प्रतिशत जीएसटी जोड़ने की शिकायतें सामने आई हैं। ग्राहकों का आरोप है कि एजेंटों द्वारा अभद्र व्यवहार भी किया गया, जिससे विवाद और बढ़ गया। घटना ने यह बहस भी छेड़ दी है कि क्या उपभोक्ता संरक्षण कानून केवल कागजों तक सीमित हैं? यदि बड़े मॉल और रिटेल चेन भ्रामक ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को गुमराह करेंगे तो आम आदमी का भरोसा बाजार व्यवस्था से उठ जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच और पारदर्शी कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी प्रतिष्ठान उपभोक्ता अधिकारों की अनदेखी न कर सके। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो मामला और तूल पकड़ सकता है। शहडोल की यह घटना सिर्फ एक स्टोर का विवाद नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों, बाजार की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन चुकी है।
