32 लाख से ज्यादा के कामों में खेल! जांच में खुला बड़ा घोटाला, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तलवार

जांच समिति की रिपोर्ट में भारी अनियमितताएं उजागर, गुणवत्ता और भुगतान दोनों पर उठे सवाल


Junaid Khan - शहडोल। जिले की एक ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जांच समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 32 लाख रुपये से अधिक के विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। कई कार्यों में बिना स्वीकृति राशि निकाली गई, तो कहीं स्वीकृत राशि से अधिक खर्च दिखाकर शासन को चूना लगाया गया।

जांच में सामने आया कि जिन कार्यों को कागजों में पूर्ण दिखाया गया, वे जमीनी स्तर पर या तो अधूरे हैं या उनकी गुणवत्ता बेहद खराब है। नाली निर्माण, सांस्कृतिक मंच, पुलिया और सड़क जैसे कार्यों में भारी गड़बड़ी पाई गई है। कई जगहों पर लागत बढ़ाकर भुगतान किया गया, जबकि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।

बिना स्वीकृति खर्च और फर्जी भुगतान का खेल 

रिपोर्ट के अनुसार पंचायत मरम्मत, सौंदर्यीकरण और अन्य कार्यों में बिना मंजूरी के ही लाखों रुपये खर्च कर दिए गए। पुलिया निर्माण और अन्य कार्यों में भी स्वीकृति से अधिक राशि निकालने के प्रमाण मिले हैं। पंचायत भवन की पुताई, लेखन और बिजली फिटिंग जैसे कार्यों में भी अनियमित भुगतान सामने आया है।

गुणवत्ता पर उठे सवाल, कई कार्य अधूरे

जांच में यह भी सामने आया कि जिन कार्यों पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, उनकी गुणवत्ता बेहद खराब है। कुछ कार्य अधूरे पड़े हैं, जबकि कुछ का अस्तित्व ही संदिग्ध है। नाली और मंच निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई।

साहब फरार जांच में सहयोग नहीं 

जांच समिति ने उपयंत्री को जवाब देने के लिए बुलाया, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने इसे संदिग्ध माना है। अधिकारियों का कहना है कि बार-बार नोटिस देने के बावजूद जवाब नहीं दिया गया।

अल्टीमेटम जारी,सख्त कार्रवाई तय 

प्रशासन ने संबंधित उपयंत्री को अंतिम अवसर देते हुए तय समयसीमा तक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। चेतावनी दी गई है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इसे दोष स्वीकार मानते हुए कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विकास के नाम पर धोखा?

पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। जांच रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर स्पष्ट संकेत मिले हैं कि योजनाओं को कागजों में पूरा दिखाकर राशि का बंदरबांट किया गया। निष्कर्ष: यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितताओं का है, बल्कि विकास कार्यों की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब सबकी निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि दोषियों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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