होली त्योहार की मस्ती के बीच कैसे रखें स्वयं को फिट और एक्टिव
Junaid Khan - शहडोल। योगाचार्य शिवाकान्त शुक्ला के अनुसार भारतीय संस्कृति में होली केवल रंगों का खेल या पकवानों का आनंद मात्र नहीं है। योग और अध्यात्म की दृष्टि से यह पर्व 'स्व' से 'सर्व' की ओर बढ़ने और अंतर्मन के विकारों को भस्म कर नवीन ऊर्जा के संचार का अवसर है। होलिका दहन नकारात्मकता का विसर्जन है। होलिका दहन का आध्यात्मिक अर्थ अहंकार, ईर्ष्या और क्रोध जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों को ज्ञान की अग्नि में स्वाहा करना है। आयुर्वेद और योग के अनुसार, होली का समय वसंत ऋतु के आगमन का होता है, जब सर्दियों में संचित 'कफ' पिघलने लगता है। होलिका की अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करने से निकलने वाली गर्मी शरीर के सूक्ष्म छिद्रों को साफ करती है और हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करती है। हल्दी, नीम और टेसू के फूलों से बने रंग त्वचा के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
होली पर आइए हम केवल बाहर ही नहीं, बल्कि अपने भीतर भी 'योग' की होली खेलें। अहंकार को जलाएं, क्षमा को अपनाएं और प्रेम के शाश्वत रंग में रंग जाएं। जैसा कि योग गुरु कहते हैं। योग जीवन को उत्सव में बदल देता है। योगाचार्य शिवाकान्त शुक्ला ने होली के दौरान अधिक मीठा, तला-भुना खाना और रंगों के शोर से होने वाली थकान को दूर करने के लिए निम्न यौगिक क्रियाएं बता रहे हैं जिसे अपनाकर आप फिट रह सकते हैं: शरीर की आंतरिक शुद्धि के लिए कपालभाति : त्योहार के दौरान खाए गए भारी भोजन और शरीर में जमा टॉक्सिन्स को बाहर निकालने के लिए कपालभाति सबसे प्रभावी है। यह जठराग्नि को तीव्र करता है और पाचन तंत्र को सक्रिय करता है। फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और त्वचा पर प्राकृतिक चमक लाता है। मन की शांति के लिए भ्रामरी प्राणायाम :
होली के शोर-शराबे और हुड़दंग के बाद अक्सर मस्तिष्क में उत्तेजना बढ़ जाती है। भ्रामरी प्राणायाम की गुंजन ध्वनि तंत्रिका तंत्र को तुरंत शांत करती है। यह अनिद्रा और तनाव से मुक्ति दिलाकर गहरी शांति प्रदान करता है। ठंडक और पित्त शांति के लिए शीतली प्राणायाम : होली के समय तापमान बढ़ने लगता है। यदि रंगों से त्वचा में जलन हो या शरीर में गर्मी महसूस हो, तो शीतली प्राणायाम का अभ्यास करें। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है और रक्त को शुद्ध करता है। स्फूर्ति के लिए मर्कटासन और पवनमुक्तासन : दिनभर की भागदौड़ के बाद कमर दर्द और भारीपन को दूर करने के लिए ये दो आसन रामबाण हैं। मर्कटासन: रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और मानसिक थकान दूर करता है।
पवनमुक्तासन: पेट की गैस और अपच की समस्या से तुरंत राहत देता है। ध्यान: यदि आप रंगों के उत्सव के साथ 10 मिनट का ध्यान जोड़ दें, तो यह पर्व केवल शारीरिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक आनंद का स्रोत बन जाएगा।
