महिला दिवस पर योगाचार्य शिवाकान्त शुक्ला का संदेश-हर महिला प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट योग को दे
Junaid Khan - शहडोल। आज की आधुनिक महिला घर और ऑफिस की दोहरी जिम्मेदारियों के बीच एक मजबूत सेतु की तरह कार्य कर रही है। परिवार, समाज और कार्यस्थल की जिम्मेदारियों को निभाते हुए महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भूल जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर, जिसका इस वर्ष का विषय “Give To Gain (देने से ही प्राप्ति)” रखा गया है, यह समय महिलाओं के लिए स्वयं को स्वास्थ्य का उपहार देने का है, ताकि वे परिवार और समाज को और अधिक सशक्त बना सकें।
योग विशेषज्ञ योगाचार्य शिवाकान्त शुक्ला, संस्थापक शिवजी योग थैरेपी एवं वेलनेस सेंटर, शहडोल के अनुसार योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि महिलाओं के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए एक अमूल्य साधन है। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास महिलाओं के जीवन में संतुलन, ऊर्जा और आत्मविश्वास लाता है। हार्मोनल संतुलन में सहायक महिलाओं के शरीर में किशोरावस्था से लेकर रजोनिवृत्ति तक कई हार्मोनल बदलाव होते हैं। योगाचार्य शिवाकान्त शुक्ला के अनुसार भुजंगासन, सर्वांगासन और मत्स्यासन जैसे योगाभ्यास थायराइड सहित अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों को संतुलित करने में सहायक होते हैं। इससे पीसीओएस, हार्मोनल असंतुलन और अनियमित मासिक धर्म जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। मानसिक शांति और तनाव से मुक्ति। महिलाएं अक्सर मल्टीटास्किंग के कारण मानसिक थकान और तनाव का सामना करती हैं। ऐसे में नाड़ीशोधन, भ्रामरी और उद्गीत प्राणायाम मस्तिष्क को शांत करने में सहायक होते हैं। इससे तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर कम होता है और चिंता व अवसाद जैसी समस्याओं से लड़ने में मदद मिलती है। शारीरिक मजबूती और लचीलापन। बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में हड्डियों का घनत्व कम होने की समस्या देखी जाती है। ताड़ासन, वीरभद्रासन और वृक्षासन जैसे योगाभ्यास न केवल हड्डियों को मजबूत बनाते हैं, बल्कि शरीर के पोस्चर को भी सुधारते हैं और संतुलन बनाए रखते हैं। गर्भावस्था और प्रसव में लाभकारी। गर्भावस्था के दौरान विशेषज्ञ की देखरेख में किया गया प्रसव पूर्व योग मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। मार्जरी आसन और बद्ध कोणासन जैसे आसन प्रसव प्रक्रिया को आसान बनाने में सहायक माने जाते हैं। योगाचार्य शिवाकान्त शुक्ला ने कहा कि जब महिलाएं स्वस्थ और सशक्त होती हैं, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने सभी महिलाओं से अपील की कि वे अपने व्यस्त जीवन से कम से कम 30 मिनट प्रतिदिन योग के लिए अवश्य निकालें। उन्होंने कहा,महिलाएं परिवार की धुरी होती हैं। यदि वे स्वयं स्वस्थ रहेंगी, तभी एक स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है। योग न केवल बीमारियों से दूर रखता है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान को भी जागृत करता है। महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने समाज के सभी वर्गों से महिलाओं को योग अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की, ताकि एक स्वस्थ, संतुलित और सशक्त भविष्य की नींव रखी जा सके।

