मौत के मुंह से वापस लौटी जिंदगी

जिला अस्पताल शहडोल में डॉक्टरों ने बचाई महिला की जान, डिफिब्रिलेटर शॉक से फिर धड़का दिल 


Junaid Khan - शहडोल। जिला चिकित्सालय शहडोल में चिकित्सकों की तत्परता,सूझबूझ और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के सही उपयोग से एक महिला मरीज की जान बचाने का प्रेरणादायक मामला सामने आया है। गंभीर हालत में भर्ती महिला का ब्लड प्रेशर तक रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था और उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी, लेकिन डॉक्टरों की त्वरित कार्रवाई ने उसे मौत के मुंह से वापस लौटा दिया।

गंभीर हालत में भर्ती हुई थी मरीज 

जानकारी के अनुसार टप्पू बाई यादव नामक महिला को अत्यंत गंभीर स्थिति में जिला चिकित्सालय के फीमेल वार्ड में भर्ती कराया गया था। उस समय मरीज की हालत इतनी नाजुक थी कि उसका ब्लड प्रेशर तक रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ. अब्दुल वसीम खान ने तत्काल निर्णय लेते हुए मरीज को आईसीसीयू (ICCU) में शिफ्ट कराया।

दिल की धड़कन लगभग बंद,दिया गया डिफिब्रिलेटर शॉक

मरीज की हालत बेहद गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने परिजनों को स्थिति की पूरी जानकारी देते हुए प्रोग्नोसिस समझाया और लिखित सहमति प्राप्त की। इसके बाद चिकित्सा टीम ने तुरंत आपातकालीन उपचार शुरू किया। उपचार के दौरान मरीज का दिल लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच गया था। ऐसे में चिकित्सा प्रोटोकॉल के तहत डॉक्टरों ने डिफिब्रिलेटर से 120 जूल का इलेक्ट्रिक शॉक दिया और साथ ही आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं भी दी गईं। डॉक्टरों के प्रयास रंग लाए और कुछ ही क्षणों में मरीज के दिल की धड़कन फिर से शुरू हो गई।

आईसीयू में निगरानी के बाद हालत हुई स्थिर

समय पर मिले उपचार के कारण महिला की जान बच गई। इसके बाद मरीज को जिला अस्पताल के आईसीयू के बेड नंबर-3 में भर्ती कर लगातार निगरानी में रखा गया। कुछ दिनों के उपचार और देखरेख के बाद उसकी हालत में लगातार सुधार हुआ और अब वह पूरी तरह स्थिर हो गई।

स्वस्थ होकर घर लौटी महिला, डॉक्टर को दिया धन्यवाद 

लगातार इलाज के बाद 13 मार्च 2026 को टप्पू बाई यादव को अस्पताल से सफलतापूर्वक डिस्चार्ज कर दिया गया। डिस्चार्ज होने के बाद वह सीधे डॉ. अब्दुल वसीम खान की क्लिनिक पहुंचीं और उन्हें धन्यवाद देते हुए आभार व्यक्त किया। महिला के परिजनों ने भी डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ की सराहना करते हुए कहा कि उनकी तत्परता के कारण ही आज टप्पू बाई को नई जिंदगी मिल सकी।

अस्पताल के लिए बना प्रेरणादायक उदाहरण

यह घटना जिला अस्पताल शहडोल के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है, जहां डॉक्टरों की सूझबूझ, त्वरित निर्णय और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के सही उपयोग से एक जिंदगी को मौत के मुंह से वापस लाया जा सका। डॉक्टरों की इस मानवीय सेवा और पेशेवर कुशलता की जिलेभर में सराहना की जा रही है।

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