रोटरी राहत शिविर में मुंबई, गुरुग्राम,भोपाल, रायपुर तक से पहुंचेगे विशेषज्ञ चिकित्सक
Junaid Khan - शहडोल। आईटीआई परिसर शहडोल में 13,14 व 15 मार्च को आयोजित हो रहे रोटरी राहत नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर में हृदय, किडनी, कैंसर, त्वजा जैसी बीमारियों का न केवल उपचार होगा,बल्कि आवश्यकता के अनुसार छोटी-बड़ी सर्जरी भी की जाएगी। राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट विवेक कृष्ण तन्खा के प्रयासों से रोटरी क्लब शहडोल, मण्डला मैकल एवं जबलपुर, राजकृष्ण तन्खा फाउंडेशन, चिरायु मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल भोपाल तथा लोक स्वास्थ्य चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग मप्र शासन व जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित शिविर में देश के बड़े चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं देंगे। आयोजकों के अनुसार चिरायु मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की टीम डॉ. अजय गोयनका के साथ तीनों दिन मौजूद रहेंगे। वहीं बाम्बे हॉस्पिटल और लीलावती मुंबई के स्पाइन सुपर स्पेसलिस्ट डॉ. विशाल कुंदनानी स्वयं शिविर में आ रहे हैं। साथ ही घुटना एवं जोड़ प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. गिरीश देवानी, किडनी के डॉ. सयाली कोडाले, त्वचा रोग डॉ. राजेश कुमार, थायराइड के डॉ. नीपा वी के अलावा टीम में स्पाइन स्पेशलिस्ट डॉ. मनींद्र भूषण व डॉ. जेनिल पटेल, डॉ. प्रीतम अग्रवाल घुटना रोग विशेषज्ञ, डॉ. आदित्य द्विवेदी शहडोल आर्थोपैट्रिक, डॉ. विनोद अग्रवाल हृदय रोग विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जन डॉ. राजेश वर्मा व डॉ. राज शर्मा, डॉ. ललित निहाल, डॉ. दीपक शुक्ला गैस्ट्रो सर्जन, डॉ. आशुतोष अग्रवाल शिशु रोग, डॉ. दिव्यानी टी स्त्री रोग, डॉ. अवनि सरकार, डॉ. प्रिया यादव, डॉ. प्रियंका पंडारे फिजियो थैरेपिस्ट, डॉ. अंबिका गुप्ता फेफड़ा रोग, डॉ. स्मिता द्विवेदी दंत रोग, डॉ. दिवाकर, डॉ. पुनीत, डॉ. दिव्यानी, जबलपुर के डॉ. राजेश अपनी टीम के साथ, मेदांता हास्पिटल गुरुग्राम से कार्डियोलाजिस्ट डॉ. स्वर्णिम सिंह व टीम, मणिपाल हास्पिटल नोएडा से डॉ. मानस मुकुलदत्ता कार्डियोलाजिस्ट, डॉ. राजीव वर्मा फिजीसियन सेवाएं देने आ रहे हैं।
ब्लड डोनेशन कैंप आज
शिविर के दौरान रक्त की कमी को दूर करने के लिए रक्तदान शिविर का आयोजन 11 मार्च को आयोजित किया गया है। यह शिविर जिला चिकित्सालय में आयोजित होगा। रोटरी क्लब के अध्यक्ष कृष्ण कुमार गुप्ता लाला एवं संयोजक राजेश गुप्ता ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान जरूरत पडऩे पर उपयोग हो सकेगा। यदि इसके बाद रक्त बच गया तो शिकलसेल मरीजों के काम आ सकेगा।
