नई परिवहन नीति पर टकराव के बीच सरकार ने अधिसूचना रोकी, होली से पहले यात्रियों को बड़ी राहत
Junaid khan - शहडोल। भोपाल, 01 मार्च 2026। नई परिवहन नीति को लेकर प्रदेशभर में छिड़े विवाद और दो मार्च से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन बस हड़ताल के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। डॉ. मोहन यादव से सकारात्मक चर्चा के बाद मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन ने अपनी हड़ताल वापस लेने की घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री द्वारा जारी एक सूचना और अधिसूचना को होल्ड करने के निर्देश के बाद यह निर्णय लिया गया। होली के ऐन पहले संभावित परिवहन संकट टलने से लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। सुगम परिवहन भी, किसी का नुकसान भी नहीं– मुख्यमंत्री। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समत्व भवन में बस ऑनर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के हर ग्रामीण अंचल तक सुगम और सस्ती परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया की लोक परिवहन सेवा निर्बाध रूप से चलती रहे,यात्रियों को परेशानी न हो,और बस ऑपरेटरों के हितों की भी रक्षा हो। इसी संतुलन के साथ निर्णय लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने परिवहन मंत्री को भी निर्देशित किया कि बस संचालकों की शंकाओं और समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाए। दोनों पक्षों की सहमति के बाद ही आगे की कार्यवाही होगी।
क्या था पूरा विवाद?
दरअसल 24 दिसंबर 2025 और 29 जनवरी 2026 को राजपत्र में प्रकाशित नई परिवहन नीति के कुछ संशोधनों को लेकर निजी बस संचालकों में असंतोष था।
बस ऑपरेटरों का आरोप था कि परमिट शर्तों में बदलाव,रूट निर्धारण में सख्ती,फिटनेस और तकनीकी प्रावधानों में वृद्धि,
आर्थिक दायित्वों में बढ़ोतरी
से छोटे और मध्यम बस मालिकों पर सीधा वित्तीय बोझ पड़ेगा।
एसोसिएशन का तर्क था कि 2005 में राज्य सड़क परिवहन निगम के बंद होने के बाद से निजी बस संचालक ही प्रदेश में यात्री सेवा की रीढ़ बने हुए हैं। ऐसे में बिना व्यापक चर्चा के नीति लागू करना उचित नहीं होगा।
दो मार्च से चक्का जाम का ऐलान
प्रदेश स्तरीय बैठक के बाद 02 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की गई थी।
शहडोल सहित पूरे प्रदेश में बसों के पहिए थमने की स्थिति बन गई थी। शहडोल जिले में प्रतिदिन करीब 300 से अधिक बसें विभिन्न रूटों पर संचालित होती हैं। यदि हड़ताल होती तो होली पर घर लौट रहे यात्रियों को परेशानी,छात्रों और नौकरीपेशा लोगों की दिनचर्या बाधित, ग्रामीण मरीजों और किसानों की आवाजाही प्रभावित,किराए में संभावित वृद्धि जैसी स्थितियाँ पैदा हो सकती थीं।
शहडोल में सौंपा गया था ज्ञापन
शहडोल जिला बस ऑनर्स एसोसिएशन ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। अध्यक्ष भगवत प्रसाद गौतम (महंत गौतम) और सचिव देवेन्द्र मिश्रा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में बस संचालक उपस्थित रहे। ज्ञापन में मांग की गई थी कि। संशोधित प्रावधानों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए,पूर्व व्यवस्था यथावत रखी जाए,बस संचालकों से संवाद स्थापित कर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।
सकारात्मक वार्ता के बाद हड़ताल समाप्त
मुख्यमंत्री से चर्चा और अधिसूचना होल्ड करने के आश्वासन के बाद बस ऑनर्स एसोसिएशन ने 2 मार्च से प्रस्तावित हड़ताल वापस लेने की घोषणा की। एसोसिएशन पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने संवाद का रास्ता अपनाकर समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल की है।
बैठक में परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, सचिव परिवहन मनीष सिंह तथा प्रदेश के विभिन्न संभागों से आए बस ऑनर्स उपस्थित रहे। निष्कर्ष: टला बड़ा संकट,अब नजर नीति संशोधन पर नई परिवहन नीति पर उठा विवाद केवल बस संचालकों और सरकार के बीच का टकराव नहीं था, बल्कि यह प्रदेश की परिवहन व्यवस्था, रोजगार और आमजन की सुविधा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका था। फिलहाल मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से होली से पहले संभावित परिवहन संकट टल गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और बस संचालकों के बीच संवाद से अंतिम समाधान किस रूप में सामने आता है।


