बीच सड़क मौत का गड्ढा: वार्ड 19 में एक हफ्ते से खुला सीवर चेम्बर, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
Junaid Khan - शहडोल। शहर की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नगर के वार्ड क्रमांक 19, घरौला मोहल्ला में मदरसे के पास किराना दुकान के बगल से गुजरने वाले मुख्य मार्ग पर सीवर लाइन का चेम्बर पिछले एक सप्ताह से खुला पड़ा है, जो अब सीधे-सीधे मौत का न्योता देता नजर आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही के बावजूद न तो नगर पालिका ने कोई ठोस कदम उठाया है और न ही संबंधित सीवर कंपनी ने मरम्मत की जहमत उठाई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, चेम्बर का ढक्कन क्षतिग्रस्त होकर टूट गया था, जिसके बाद से यह गहरा गड्ढा खुलेआम सड़क के बीचों-बीच लोगों की जान से खेल रहा है। आसपास किसी भी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत तक नहीं लगाए गए, जिससे खतरा कई गुना बढ़ गया है। हर पल हादसे का डर, पहले भी हो चुकी दुर्घटना। बताया जा रहा है कि हाल ही में एक ऑटो इसी खुले चेम्बर के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है। इसके बावजूद जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी। यह मार्ग पूरे मोहल्ले का मुख्य रास्ता है, जहां से रोजाना स्कूल बस, वैन, एम्बुलेंस और भारी वाहनों का आवागमन होता है। बच्चों से भरी स्कूल बसें इसी रास्ते से गुजरती हैं, ऐसे में जरा सी चूक किसी बड़े हादसे में बदल सकती है। जनता की चेतावनी: अब भी नहीं जागे तो होगा बड़ा हादसा। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि अगर जल्द ही इस चेम्बर को ठीक नहीं किया गया तो कोई बड़ा हादसा होना तय है। लोगों ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि भविष्य में कोई दुर्घटना होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और नगर पालिका की होगी। एक ही रास्ता, खतरे से भरा सफर। मोहल्ले के लोगों के पास आने-जाने के लिए यही एक मुख्य मार्ग है। वैकल्पिक रास्ता इतना खराब है कि वहां से केवल दोपहिया वाहन ही निकल सकते हैं। ऐसे में मजबूरी में लोग इसी जानलेवा रास्ते का उपयोग कर रहे हैं। प्रशासन को खुली चुनौती यह मामला केवल एक टूटे ढक्कन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता का आईना है। सवाल उठता है कि आखिर कब तक आम जनता की जान यूं ही जोखिम में डाली जाती रहेगी? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? जनता की मांग: तत्काल चेम्बर का ढक्कन बदलकर सुरक्षित किया जाए। अस्थायी बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो। अब देखना यह होगा कि खबर के बाद प्रशासन हरकत में आता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है।
