आरटीओ बैरियर पुनः चालू करने पर बवाल: ट्रक ऑपरेटरों में आक्रोश,कांग्रेस परिवहन प्रकोष्ठ ने उठाए भ्रष्टाचार के सवाल-मुनव्वर अली जिलाध्यक्ष
Junaid Khan - शहडोल। मध्य प्रदेश में आरटीओ चेक पोस्ट (बैरियर) को पुनः संचालित किए जाने संबंधी माननीय हाई कोर्ट के निर्णय के बाद ट्रक ऑपरेटरों में गहरी चिंता और असंतोष का माहौल बन गया है। परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले भी बैरियरों पर अवैध वसूली,अनावश्यक रोक-टोक और उत्पीड़न जैसी गंभीर शिकायतें सामने आती रही हैं, जिससे उनका व्यवसाय प्रभावित होता रहा है। इसी मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के परिवहन प्रकोष्ठ ने भी खुलकर विरोध दर्ज कराया है। परिवहन प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष नरेंदर सिंह पांधे ने बयान जारी करते हुए कहा कि केवल बैरियरों को पुनः चालू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि परिवहन व्यवसाय पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रहा है डीजल की बढ़ती कीमतें, टैक्स का दबाव और प्रशासनिक दखल पहले ही परेशानी का कारण बने हुए हैं। ऐसे में यदि बैरियरों पर फिर से अवैध वसूली शुरू होती है, तो यह ट्रक ऑपरेटरों के लिए आर्थिक रूप से और भी भारी पड़ सकता है। जिला स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई गई है। मोहम्मद तौहीद खान (उपाध्यक्ष, मप्र कांग्रेस परिवहन प्रकोष्ठ, जिला शहडोल) और मुनव्वर अली,साकिब (जिला अध्यक्ष) ने संयुक्त रूप से कहा कि यदि सरकार बैरियर चालू करती है तो यह भी सुनिश्चित करे कि वहां किसी प्रकार की अवैध गतिविधि न हो और दोषियों पर तत्काल कड़ी कार्रवाई हो। वहीं, परिवहन प्रकोष्ठ से जुड़े अन्य पदाधिकारियों ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पूर्व में कई बार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। अब यदि बैरियर फिर से चालू होते हैं, तो बिना सख्त निगरानी तंत्र के यह समस्या और गंभीर हो सकती है।ट्रक ऑपरेटरों ने मांग की है कि बैरियरों पर सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य की जाए ऑनलाइन भुगतान प्रणाली लागू हो शिकायतों के लिए हेल्पलाइन और त्वरित कार्रवाई तंत्र बनाया जाए कांग्रेस परिवहन प्रकोष्ठ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और प्रशासन ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। निष्कर्ष: आरटीओ बैरियरों की पुनः शुरुआत जहां प्रशासनिक दृष्टि से जरूरी कदम माना जा रहा है, वहीं बिना पारदर्शिता और सख्त नियंत्रण के यह निर्णय परिवहन व्यवसाय के लिए नई मुसीबत बन सकता है। अब नजरें सरकार और न्यायालय के आगामी निर्देशों पर टिकी हैं कि वे इस व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।
