नियमित छात्रा को ‘प्राइवेट’ घोषित करने का मामला गरमाया, कलेक्टर से न्याय की गुहार शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

पूरे सत्र में नियमित उपस्थिति के बावजूद 10वीं की छात्रा को किया गया प्राइवेट, प्रोजेक्ट में भी नहीं दिए अंक जांच की मांग तेज 


Junaid Khan - शहडोल। जिले के बाणसागर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां कक्षा 10वीं की छात्रा के साथ कथित अनियमितता का मामला सामने आने के बाद अब यह मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्रा दीपारानी तिवारी ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। छात्रा का कहना है कि वह पूरे सत्र में नियमित रूप से विद्यालय आती रही और बोर्ड परीक्षा में भी सम्मिलित हुई। लेकिन जब परीक्षा परिणाम घोषित हुआ, तो उसे नियमित के बजाय ‘प्राइवेट’ छात्रा घोषित कर दिया गया, जिससे उसका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हुआ है। इतना ही नहीं, छात्रा का यह भी आरोप है कि उसे प्रोजेक्ट कार्य में एक भी अंक नहीं दिए गए, जबकि उसने सभी आवश्यक कार्य समय पर पूरे किए थे। इस कारण उसके कुल परिणाम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। मामले की जानकारी मिलने पर जब विद्यालय प्रशासन और संबंधित क्लास टीचर से संपर्क किया गया, तो बताया गया कि छात्रा की उपस्थिति कम होने के कारण उसे प्राइवेट घोषित किया गया है। हालांकि, छात्रा और उसके अभिभावकों का आरोप है कि उन्हें इस संबंध में पहले कभी कोई सूचना नहीं दी गई। छात्रा का कहना है कि यदि समय रहते उसे सूचना दी जाती, तो वह अपनी उपस्थिति सुधार सकती थी और इस स्थिति से बचा जा सकता था। इस पूरे मामले को लेकर छात्रा दीपारानी तिवारी ने कलेक्टर को आवेदन सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और उचित न्याय दिलाने की मांग की है। उसने यह भी कहा कि इस प्रकार की लापरवाही न केवल उसके साथ अन्याय है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाती है। मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग सकता है।

अब सबकी निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या छात्रा को समय पर न्याय मिल पाता है या नहीं। निष्कर्ष: यह मामला केवल एक छात्रा का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता का प्रश्न बन चुका है। यदि जांच में लापरवाही या त्रुटि सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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