नेत्रदान: मौत के बाद भी रोशनी बनीं सरस्वती देवानी,दो जिंदगियों में उजाला भरने का संकल्प पूरा मृत्यु के बाद भी जीवन का उजाला…

सरस्वती देवानी की आंखें अब देंगी किसी को नई रोशनी”


Junaid Khan - शहडोल। मानवता की मिसाल पेश करते हुए नगर के कृष्णा कॉलोनी निवासी 67 वर्षीय सरस्वती देवानी ने मृत्यु के बाद भी जिंदगी को रोशन करने का अनूठा संदेश दिया। उनके निधन के बाद परिजनों ने संवेदन शीलता दिखाते हुए नेत्रदान की सहमति दी, जिससे अब उनकी आंखें किसी नेत्रहीन के जीवन में उजाला भरेंगी। यह पहल न केवल समाज के लिए प्रेरणा बनी है, बल्कि “नेत्रदान महादान” की भावना को भी सशक्त करती है। बुधवार देर शाम उनके निधन के बाद परिवार ने दुख की घड़ी में भी मानवता को प्राथमिकता दी। जैसे ही मेडिकल कॉलेज को सूचना दी गई, नेत्र रोग विभाग की विशेष टीम तत्काल सक्रिय हुई और देर रात उनके निवास पर पहुंचकर पूरी प्रक्रिया सावधानीपूर्वक संपन्न की। परिजनों के इस फैसले ने यह साबित कर दिया कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि किसी और के जीवन की नई शुरुआत भी हो सकती है। नेत्र विशेषज्ञों ने बताया कि सरस्वती देवानी की आंखों से सुरक्षित रूप से कॉर्निया निकाला गया, जिसे विशेष सुरक्षा मानकों के तहत लैब भेजा गया है। परीक्षण और संरक्षण के बाद इनका उपयोग नेत्र प्रत्यारोपण में किया जाएगा। इससे दो जरूरतमंद व्यक्तियों को दृष्टि मिलने की उम्मीद है। इस पूरे कार्य में मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की टीम ने अहम भूमिका निभाई। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. धीरेंद्र पांडे के नेतृत्व में टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रक्रिया को सफल बनाया। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रग्या शुक्ला एवं अन्य चिकित्सकों के सहयोग से यह कार्य पूरी संवेदनशीलता और दक्षता के साथ संपन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि इस दौरान परिवार के सदस्यों ने अमरज्योति नेत्रदान महादान संस्था के साथ मिलकर विशेष सहयोग दिया, जिससे यह नेक कार्य संभव हो सका। समाज के लिए संदेश: सरस्वती देवानी का यह कदम बताता है कि एक निर्णय कई जिंदगियों को रोशन कर सकता है। यदि हर व्यक्ति नेत्रदान का संकल्प ले, तो देश में अंधत्व की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जीते जी सेवा और मरने के बाद भी रोशनी यही है सच्चा मानव धर्म।

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