महुआटोला के जंगल में सरेआम जान से मारने की धमकी,दहशत में परिवार,सत्ता और सिस्टम पर गंभीर सवाल

महुआटोला के जंगल में सरेआम जान से मारने की धमकी,दहशत में परिवार,सत्ता और सिस्टम पर गंभीर सवाल


Junaid Khan - शहडोल। जयसिंहनगर रसूख और सत्ता की हनक जब सिर चढ़कर बोलने लगे, तो कानून के रक्षक भी मूक दर्शक बन जाते हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला और गंभीर मामला जयसिंहनगर जिले के ग्राम महुआटोला से सामने आया है, जहां भाजपा मंडल उपाध्यक्ष और वन विभाग के एक बीट गार्ड पर मिलकर एक सामान्य ग्रामीण को प्रताड़ित करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत पत्र सौंपकर अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है। इस घटना ने न केवल ग्रामीणों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना बीते 9 अप्रैल की बताई जा रही है, जब महुआटोला निवासी संजय जायसवाल जंगल में लकड़ी बिक्री के दौरान पहुंचा था। आरोप है कि वहां मौजूद भाजपा मंडल उपाध्यक्ष नारायण केवट ने पीड़ित को देखते ही आपा खो दिया और गालियां देते हुए टांगी (कुल्हाड़ी) लेकर उस पर हमला करने दौड़ पड़ा। किसी तरह जान बचाकर भागे पीड़ित ने अपनी जान तो बचा ली, लेकिन उसके बाद से लगातार धमकियों का सिलसिला जारी है। पीड़ित का कहना है कि आरोपी ने न सिर्फ उसे बल्कि उसके पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी दी है। यहां तक कि सरकारी कर्मचारी होने का रौब दिखाते हुए झूठे मुकदमों में फंसाने की भी चेतावनी दी गई। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सत्ता और सिस्टम के गठजोड़ के आगे आम आदमी की सुरक्षा अब भी सुनिश्चित है? और हैरानी की बात यह है कि जंगल की सुरक्षा के लिए तैनात बीट गार्ड नारायण यादव, जो अपराध रोकने की जिम्मेदारी निभाते हैं, वे ही पीड़ित को डराने-धमकाने में शामिल बताए जा रहे हैं। बीट गार्ड ने सरेआम यह तक कह दिया कि तुझे लकड़ी वैसे भी नहीं देंगे जो उनके पद के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। पीड़ित संजय जायसवाल ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि आरोपी नारायण केवट ने यह तक कहा कि “तेरे बाप की हत्या कर दी तो क्या उखाड़ लिया? शिकायत की तो तुझे, तेरे भाई और मां को भी खत्म कर देंगे।” उल्लेखनीय है कि पीड़ित के पिता की हत्या का मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन है, जिससे यह धमकी और भी भयावह रूप ले लेती है। अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर भयभीत पीड़ित ने 13 अप्रैल को एसपी कार्यालय पहुंचकर न्याय की मांग की है। उसका कहना है कि आरोपी बीट गार्ड अपने पद का दुरुपयोग कर निजी दुश्मनी निकाल रहा है और ऐसे व्यक्ति को तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए। इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। ग्रामीणों में यह चर्चा आम है कि यदि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आम जनता का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि शहडोल पुलिस इस गंभीर मामले में कितनी तत्परता दिखाती है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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