व्यापारियों के आक्रोश के आगे झुका यातायात विभाग, नो-एंट्री के तुगलकी फरमान में बड़ा संशोधन
Junaid Khan - शहडोल। शहर के हृदय स्थल गांधी चौक में लागू किए गए सख्त यातायात नियमों के खिलाफ आखिरकार व्यापारियों का गुस्सा रंग लाया। शादी-विवाह के पीक सीजन में बाजार की रफ्तार थाम देने वाले वन-वे और नो-एंट्री के तुगलकी फरमान ने जहां दुकानदारों और ग्राहकों की सांसें अटका दी थीं, वहीं अब व्यापारी एकजुटता के आगे प्रशासन को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना पड़ा है। बताया जाता है कि यातायात विभाग द्वारा शाम के समय न्यू गांधी चौक से जुड़े प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। इससे बाजार की चहल-पहल पर ब्रेक लग गया और दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही अचानक कम हो गई। हालात ऐसे बन गए थे कि व्यापार चौपट होने की कगार पर पहुंच गया, जिसे लेकर व्यापारियों में भारी नाराजगी देखी गई। नो-एंट्री के तुगलकी फरमान में संशोधन व्यापारियों के बढ़ते दबाव और विरोध के बाद यातायात प्रभारी को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। अब शाम के समय न्यू गांधी चौक से दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक नहीं रहेगी, जिससे बाजार की रौनक फिर से लौटने की उम्मीद है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि नियमों को लचीला बनाकर व्यापार और व्यवस्था के बीच संतुलन बनाया जाएगा।
दुकानें बंद कराने की साजिश का आरोप व्यापारियों ने आरोप लगाया कि भारी भीड़ के बीच इस तरह के कड़े नियम लागू करना सीधे तौर पर व्यापार को प्रभावित करने की साजिश जैसा है। उनका कहना है कि जब पूरा शहर विवाह सीजन की खरीदारी में व्यस्त है, तब इस तरह की पाबंदियां ग्राहकों को बाजार से दूर करने वाली साबित हुईं।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि इसी तरह के निर्णय जारी रहे, तो छोटे व्यापारियों के लिए रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। इस फैसले को व्यापार विरोधी बताते हुए उन्होंने खुलकर विरोध दर्ज कराया। आर-पार की लड़ाई के मूड में व्यापारी। जिला व्यापारी संघ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने यातायात प्रभारी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। लंबी बहस और तीखी चर्चाओं के बाद प्रशासन को अपने आदेश में ढील देनी पड़ी। व्यापारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में ऐसे अव्यवहारिक निर्णय लिए गए, तो आंदोलन और उग्र होगा। इनका कहना है…हम शहर की व्यवस्था सुधारने में पूरा सहयोग करना चाहते हैं, लेकिन नियमों के नाम पर व्यापार की बलि चढ़ाना कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा निष्कर्ष: शहडोल में यह मामला अब सिर्फ यातायात व्यवस्था का नहीं, बल्कि व्यापार और प्रशासन के बीच संतुलन की बड़ी परीक्षा बन गया है। फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन व्यापारियों की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।
