तपती दोपहरी में कलेक्ट्रेट बना प्यास का मैदान,बूंद-बूंद को तरसे लोग

व्यवस्था नदारद: शिकायत लेकर पहुंचे ग्रामीणों को पानी तक नसीब नहीं, जिम्मेदार मौन


Junaid Khan - शहडोल। भीषण गर्मी अपने चरम पर है, लेकिन जिले के सबसे अहम प्रशासनिक केंद्र कलेक्ट्रेट परिसर में ही आमजन को राहत के बजाय परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां आने वाले सैकड़ों लोग पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए जूझते नजर आ रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कलेक्ट्रेट परिसर अब लोगों के लिए “प्यास का मैदान” साबित हो रहा है। दूर-दराज के गांवों से अपनी समस्याएं लेकर पहुंचने वाले ग्रामीण घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी समस्या यास का कोई समाधान नहीं दिखता। परिसर में न ठंडे पानी की व्यवस्था है, न ही कोई स्थायी प्याऊ या हैंडपंप, जिससे लोगों को राहत मिल सके। पानी के लिए भटकते लोग, छांव भी बनी मजबूरी। गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच लोग इधर-उधर पानी की तलाश में भटकते दिखाई देते हैं। कई लोग पेड़ों के नीचे बैठकर राहत पाने की कोशिश करते हैं, लेकिन प्यास बुझाने का कोई साधन नहीं मिलता। छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इस स्थिति से सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं। जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल। कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर पेयजल की कमी प्रशासनिक उदासीनता को साफ उजागर कर रही है। जहां एक ओर योजनाओं और व्यवस्थाओं की बात की जाती है, वहीं जमीनी हकीकत में बुनियादी सुविधाएं तक गायब हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे। कई बार शिकायत, फिर भी समाधान नहीं। स्थानीय लोगों और आने-जाने वाले ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी कई बार अधिकारियों तक पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। गर्मी बढ़ने के साथ परेशानी भी लगातार बढ़ती जा रही है। मांग: तुरंत बने स्थायी व्यवस्था लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कलेक्ट्रेट परिसर में जल्द से जल्द ठंडे पानी की व्यवस्था, प्याऊ और अन्य जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि आमजन को राहत मिल सके। नजरिया: कलेक्ट्रेट सिर्फ प्रशासन का केंद्र नहीं, बल्कि आम जनता की उम्मीदों का स्थान है। अगर यहां ही बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।

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