चोरी के फोन अनलॉक कर फर्जी बिल के सहारे करोड़ों का खेल, जांच एजेंसियों की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल
Junaid Khan - शहडोल। मध्यप्रदेश जिले शहडोल में इन दिनों मोबाइल कारोबार के नाम पर एक बड़े अवैध नेटवर्क के सक्रिय होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इनसाइड कटिंग के जरिए कम कीमत में मोबाइल बेचने और बाहर से चोरी हुए मोबाइल फोन को अनलॉक कर फर्जी बिल के साथ बाजार में खपाने का धंधा तेजी से फैल रहा है। खासकर धनौली क्षेत्र को इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बताया जा रहा है, जहां से बड़ी मात्रा में मोबाइल बाजार में सप्लाई किए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह कारोबार छोटे स्तर का नहीं बल्कि संगठित गिरोह के रूप में संचालित हो रहा है। बाहर के राज्यों से चोरी या संदिग्ध मोबाइल शहडोल लाए जाते हैं, जहां तकनीकी तरीके से उनके लॉक (IMEI/सॉफ्टवेयर) को तोड़ा जाता है। इसके बाद इन्हें नए मोबाइल के रूप में पैक कर या “ओपन बॉक्स” बताकर स्थानीय दुकानों के माध्यम से ग्राहकों को बेचा जाता है। बताया जा रहा है कि इस पूरे खेल में कुछ बड़े और नामी दुकानदारों की भी संलिप्तता सामने आ रही है, जो ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए बाकायदा अपनी दुकान के नाम से बिल भी उपलब्ध करा रहे हैं। इससे आम उपभोक्ता को यह आभास होता है कि वह वैध और सुरक्षित मोबाइल खरीद रहा है, जबकि हकीकत में वह चोरी या अवैध डिवाइस हो सकता है। इस गोरखधंधे का सबसे गंभीर पहलू टैक्स चोरी है। बिना जीएसटी के मोबाइल बेचना, फर्जी बिलिंग करना और वास्तविक आय छिपाना ये सभी गतिविधियां सरकार को सीधे राजस्व नुकसान पहुंचा रही हैं। सूत्रों का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए हर महीने लाखों रुपये का टैक्स बचाया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो रहा है।
तकनीकी जानकारों के मुताबिक, चोरी के मोबाइल फोन का IMEI बदलना या सॉफ्टवेयर के जरिए लॉक तोड़ना गंभीर साइबर अपराध की श्रेणी में आता है। इससे न केवल डिवाइस की वैधता समाप्त हो जाती है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर ट्रैकिंग सिस्टम पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे मोबाइल अपराधियों के हाथों में जाने पर बड़ी वारदातों में भी इस्तेमाल हो सकते हैं।
कानूनी दृष्टि से देखें तो इस मामले में कई सख्त धाराएं लागू होती हैं। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 379 (चोरी), 411 (चोरी का माल रखना/बेचना), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के तहत इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में अवैध हस्तक्षेप, जीएसटी अधिनियम 2017 के तहत कर चोरी और इनकम टैक्स एक्ट के तहत आय छिपाने जैसे गंभीर अपराध इसमें शामिल हैं। दोषी पाए जाने पर आरोपियों को भारी जुर्माना और जेल की सजा दोनों हो सकती है।
हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस अवैध कारोबार के बावजूद अब तक जिला प्रशासन, पुलिस, जीएसटी विभाग और आयकर विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह धंधा लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई प्रभावी जांच नहीं की गई।
शहर में कई दुकानों द्वारा खुलेआम सस्ते मोबाइल का प्रचार किया जा रहा है। सोशल मीडिया और बैनर-पोस्टर के जरिए ग्राहकों को आकर्षित किया जा रहा है, जिससे यह धंधा और तेजी से फैल रहा है। लोगों को कम कीमत का लालच देकर ऐसे मोबाइल बेचे जा रहे हैं, जिनकी असलियत उन्हें बाद में पता चलती है।
उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी है। ऐसे मोबाइल खरीदने पर वे अनजाने में अपराध की कड़ी का हिस्सा बन सकते हैं। पुलिस जांच में फंसने, मोबाइल के अचानक ब्लॉक हो जाने, वारंटी न मिलने और डेटा चोरी जैसे खतरे लगातार बने रहते हैं। इस पूरे मामले में विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह और अधिक फैल सकता है और जिले में संगठित साइबर अपराध को बढ़ावा दे सकता है। इससे न केवल कानून व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि वैध व्यापार करने वाले दुकानदारों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन तत्काल संयुक्त कार्रवाई करते हुए संदिग्ध दुकानों की जांच कराए, मोबाइल के IMEI नंबरों की ट्रैकिंग करे और फर्जी बिलिंग नेटवर्क का पर्दाफाश करे। साथ ही जीएसटी और आयकर विभाग को भी विशेष अभियान चलाकर ऐसे कारोबारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।
निष्कर्षतः, शहडोल में मोबाइल कारोबार के नाम पर चल रहा यह “इनसाइड कटिंग” और चोरी के मोबाइलों का खेल एक गंभीर आर्थिक और कानूनी चुनौती बनता जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह गोरखधंधा यूं ही फलता-फूलता रहेगा।
