बेटे की गुहार: लाचार बुजुर्ग दंपति की हत्या या सुनियोजित साजिश? पुलिस अधीक्षक से न्याय की मांग
Junaid Khan - शहडोल। जिले के जयसिंहनगर थाना क्षेत्र से एक ऐसी सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली साजिश सामने आई है, जिसने न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इलाके में सक्रिय भू-माफियाओं के दुस्साहस को भी उजागर कर दिया है। एक असहाय वृद्ध, जो न केवल लकवाग्रस्त था बल्कि ठीक से चल-फिर भी नहीं सकता था, उसे और उसकी पत्नी को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। इस पूरे मामले को अब मृतक के बेटे ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) के सामने उठाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। फरियादी मेहेलाल पाव द्वारा सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, उसके पिता राममिलन पाव और सौतेली माता फूलबाई पाव की मौत कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या है। आरोप है कि ग्राम अमझोर निवासी रामसजीवन कंवर और उसके पुत्र रुद्र प्रताप सिंह कंवर की नजर राममिलन की बेशकीमती पुश्तैनी जमीन पर थी। आरोपियों ने छल, प्रपंच और बहला-फुसलाकर जमीन अपने नाम तो करवा ली, लेकिन इसके बाद भी उनका लालच खत्म नहीं हुआ। बताया गया है कि मृतक राममिलन पाव लकवाग्रस्त थे और उन्हें चलने-फिरने में दूसरों का सहारा लेना पड़ता था। इस असहाय स्थिति का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने उन्हें लगातार प्रताड़ित किया। जमीन को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि आए दिन वृद्ध दंपति को धमकियां दी जाती थीं। गवाहों—बिहारी पाव, श्यामलाल और जिनिया पाव—के मुताबिक, आरोपी और मृतक के बीच अक्सर तीखी झड़पें होती थीं, जिससे यह स्पष्ट था कि वृद्ध दंपति की जान पर खतरा मंडरा रहा था। मामले में यह भी खुलासा हुआ है कि मृतक राममिलन पाव ने अपनी जान बचाने के लिए कई बार प्रशासन से गुहार लगाई थी। उन्होंने 17 जुलाई 2021 को तहसीलदार और 1 जनवरी 2022 को कलेक्टर तक लिखित शिकायतें की थीं, लेकिन इसके बावजूद समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यही लापरवाही अब बड़े सवाल खड़े कर रही है कि जब एक दिव्यांग वृद्ध बार-बार अपनी जान का खतरा बता रहा था, तो प्रशासन ने गंभीरता क्यों नहीं दिखाई? फरियादी मेहेलाल पाव ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि यह पूरी घटना एक सुनियोजित षड्यंत्र है, जिसका मकसद जमीन के विवाद को हमेशा के लिए खत्म करना था। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच कराते हुए मुख्य गवाहों से सख्ती से पूछताछ की जाए, ताकि इस खौफनाक साजिश के पीछे छिपे सभी चेहरे बेनकाब हो सकें। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शहडोल पुलिस इस गंभीर मामले में भू-माफियाओं पर शिकंजा कस पाएगी, या फिर एक गरीब और बेबस बेटे की न्याय की गुहार भी फाइलों में दबकर रह जाएगी। यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता और लापरवाही का आईना भी बनता जा रहा है।
