एडीजी-आईजी-डीआईजी-एसपी की मुस्तैदी को दिखा रहे, कबाड़ी गुड्डू और जानू ठेंगा

शहडोल-अनूपपुर,उमारिया में सक्रिय 'कबाड़ सिंडिकेट' के आगे बेबस हुई खाकी,आखिर कब थमेगी करोड़ों की चोरियां?



Junaid Khan - शहडोल। सँभाग के जिले शहडोल अनूपपुर उमारिया में मध्य प्रदेश के शहडोल संभाग में इन दिनों कानून व्यवस्था और प्रशासनिक इकबाल को सीधी चुनौती देते हुए कबाड़ माफिया का एक ऐसा खौफनाक और संगठित सिंडिकेट सक्रिय हो चुका है, जिसने पुलिस महकमे के तमाम आला अधिकारियों की चौकसी पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र में एडीजी, आईजी, डीआईजी और एसपी जैसे कड़क प्रशासनिक अमले की मौजूदगी के बावजूद 'कबाड़ सिंडिकेट' पूरी तरह बेखौफ होकर फल-फूल रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक आए दिन होने वाली लाखों-करोड़ों रुपये की चोरियों का खुलासा न हो पाना अब केवल एक संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। सूत्रों की मानें तो इस पूरे अवैध साम्राज्य की कमान संभाग के दो बड़े चेहरों के हाथों में है, जिन्होंने पूरे अंचल की सुरक्षा व्यवस्था को पंगु बना कर रख दिया है।

गुड्डू और जानू का 'इंटर-डिस्ट्रिक्ट नेटवर्क'शहडोल से अनूपपुर,उमारिया तक बंटा साम्राज्य 

विश्वस्त सूत्रों से छनकर आ रही जानकारियों के अनुसार, इस पूरे कबाड़ सिंडिकेट को दो हिस्सों में बांटकर चलाया जा रहा है। शहडोल जिले में इस अवैध सिंडिकेट के संचालन का जिम्मा 'गुड्डू' नामक कथित कबाड़ माफिया के पास है, तो वहीं पड़ोसी जिले अनूपपुर में कबाड़ के इस काले खेल का मालिकाना हक 'जानू' नामक व्यक्ति के पास बताया जा रहा है। इन दोनों ने मिलकर पूरे संभाग स्तर पर एक ऐसा अदृश्य और मजबूत नेटवर्क तैयार कर लिया है, जिसके चलते सरकारी और निजी संपत्तियों को रात के अंधेरे में लगातार निशाना बनाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर चर्चाएं आम हैं कि बिना किसी ठोस और ऊंचे रसूख के इतना बड़ा इंटर-डिस्ट्रिक्ट सिंडिकेट इतने लंबे समय तक बिना किसी बड़ी कानूनी अड़चन के संचालित होना नामुमकिन है।

नाबालिगों को बनाया जा रहा मोहरा,चार पहिया गाड़ियां देकर रात में उतारा जा रहा मैदान में

इस सिंडिकेट का सबसे स्याह और चिंताजनक पहलू यह है कि इसमें देश के भविष्य यानी नाबालिग युवाओं और छोटे बच्चों को जानबूझकर धकेला जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि सिंडिकेट के आका इन नाबालिगों को, जिनमें कुछ दूर-दराज के रिश्तेदार और स्थानीय गरीब तबके के युवा शामिल हैं, अपनी चार पहिया गाड़ियां और कबाड़ काटने के आधुनिक औजार-मशीनें मुहैया कराते हैं। इन युवाओं को दिन के उजाले में पूरी तरह शांत रखा जाता है और जैसे ही रात का सन्नाटा पसरता है, इन्हें संभाग के अलग-अलग चिन्हित इलाकों में सरकारी व औद्योगिक संपत्तियों पर डाका डालने के लिए रवाना कर दिया जाता है। रात भर जागकर चोरी करने वाले ये लड़के सुबह 4 से 5 बजे के बीच माल लोड कर गुड्डू और जानू के सुरक्षित गोदामों तक पहुंचा देते हैं।

कॉलरी,रेलवे और रिलायंस के क्षेत्रों में सेंधमारी 

बुढ़ार, धनपुरी और अमलाई बने मुख्य केंद्र यह सिंडिकेट किसी आम चोरी को अंजाम नहीं दे रहा, बल्कि इसकी नजरें रिलायंस के क्षेत्रों, रेलवे की संपत्तियों और एसईसीएल की चालू व बंद पड़ी कोयला खदानों (कॉलरियों) पर टिकी हैं। बुढ़ार, धनपुरी, विचारपुर, नवलपुर, अमलाई,जैतपुर, नरोजाबाद, पाली और घुनघुटी जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक और कॉलरी क्षेत्रों में इस सिंडिकेट ने अपनी जड़ें बेहद गहरी कर ली हैं। सूत्रों के अनुसार, इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भारी मशीनरी, लोहा और कीमती औद्योगिक सामग्री गायब हो रही है। बंद पड़ी कॉलरियों के मलबे और रिलायंस व रेलवे के प्रतिबंधित क्षेत्रों से रात-रात भर में करोड़ों का लोहा काटकर कबाड़ के गोदामों में तब्दील किया जा रहा है, जिससे राजस्व को भारी चपत लग रही है।

सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका संदिग्ध,बीएसएफ,गार्ड और अधिकारियों से साठगांठ की चर्चा

आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा के बाद भी चोरियां कैसे मुमकिन हैं? यह सवाल आज आम जनता के जेहन में कौंध रहा है। जिन क्षेत्रों में चोरियां हो रही हैं, वहां आम तौर पर बीएसएफ (BSF) के जवान, निजी सुरक्षा गार्ड और कंपनियों के जिम्मेदार अधिकारी तैनात रहते हैं। बावजूद इसके, सिंडिकेट के गुर्गे बेधड़क अंदर घुसते हैं, घंटों तक गैस कटर और क्रेन जैसी भारी मशीनों का उपयोग करते हैं और माल लेकर चंपत हो जाते हैं। सूत्रों का आरोप है कि कबाड़ माफिया गुड्डू और उसके सहयोगियों की इन क्षेत्रों के कुछ भ्रष्ट सुरक्षाकर्मियों और जमीनी अधिकारियों के साथ कथित तौर पर गहरी मिलीभगत है। जब तक यह सांठगांठ अंदरूनी स्तर पर नहीं होगी, तब तक प्रतिबंधित क्षेत्रों से भारी-भरकम लोहा चोरी कर ले जाना किसी आम चोर के बस की बात नहीं है।

इंकार करने पर पुलिसिया कार्रवाई की धमकी देता गुड्डू, भय और मजबूरी के जाल में फंसे युवा

जांच का विषय यह भी है कि आखिर ये युवा इस दलदल से बाहर क्यों नहीं निकल पा रहे हैं? अंदरूनी सूत्रों ने सनसनीखेज खुलासा किया है कि सिंडिकेट के कर्ताधर्ताओं द्वारा इन लड़कों पर मानसिक और सामाजिक दबाव बनाया जाता है। यदि कोई युवक या नाबालिग इस अवैध काम को करने से इंकार करता है या दूरी बनाने की कोशिश करता है, तो उसे कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती है। माफियाओं द्वारा साफ तौर पर कहा जाता है कि अगर रात को माल नहीं निकाला, तो उन्हें पुलिस की कथित सेटिंग के दम पर किसी भी झूठे और संगीन मामले में फंसा दिया जाएगा, जिससे उनकी पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे सड़ जाएगी। इसी भय और रोज के मामूली 'खर्चा-पानी' के लालच में यह युवा पीढ़ी इस सिंडिकेट के इशारों पर नाच रही है।

सुबह की रोशनी से पहले गोदामों में डंप होता है माल,बेअसर साबित हो रही पुलिस गश्त 

इस सिंडिकेट की कार्यप्रणाली इतनी सटीक है कि पुलिस की रात्रि गश्त की दावों की हवा निकल जाती है। हर रात के लिए अलग-अलग क्षेत्र और टारगेट पहले से तय किए जाते हैं। चोरियों के बाद सुबह की पहली किरण फूटने से ठीक पहले, सारा माल गुड्डू और जानू के विभिन्न गुप्त और चिन्हित गोदामों में डंप कर दिया जाता है। दिन के समय ये शातिर चेहरे पूरी तरह कानूनगो बन जाते हैं और रात होते ही इनका सिंडिकेट सक्रिय हो जाता है। पुलिस प्रशासन द्वारा हर चौराहे पर चेकिंग और गश्त का दावा किया जाता है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि भारी वाहनों में भरकर ले जाया जा रहा चोरी का कबाड़ कभी भी पुलिस की नजरों में नहीं आता, जो खाकी की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में खड़ा करता है।

सिस्टम की चुप्पी पर सुलगते सवाल,क्या मंत्रियों और तंत्र तक पहुंच रहा है हिस्सेदारी का पैसा? 

लाखों-करोड़ों रुपये की इन लगातार चोरियों पर प्रशासनिक अमले और राजनीतिक गलियारों की चुप्पी अब संभाग में सबसे बड़ा कौतूहल बन चुकी है। क्षेत्र की जनता अब खुलकर पूछ रही है कि आखिर कबाड़ के इन दोनों सरगनाओं पर कानून का शिकंजा क्यों नहीं कसता? क्या पुलिस प्रशासन के पास इन सिंडिकेट्स को तोड़ने की ताकत नहीं है, या फिर इसके पीछे कोई अदृश्य राजनैतिक वरदहस्त काम कर रहा है? सूत्रों के गलियारों में यह सवाल तेजी से तैर रहा है कि क्या इस अवैध धंधे की काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा ऊंचे पदों पर बैठे सफेदपोशों, मंत्रियों या तंत्र के नीति-नियंताओं तक पहुंच रहा है? यदि ऐसा नहीं है, तो फिर सरकार और प्रशासन इस महालूट पर मौन क्यों साधे हुए हैं?

अनूपपुर,उमरिया में नए एसपी और शहडोल संभाग में नए आईज,डीआईजी की परीक्षा शुरू

इधर हाल ही में अनूपपुर,उमारिया जिले में नए पुलिस अधीक्षक (SP) ने अपना पदभार ग्रहण किया है। अब पूरे जिले की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि क्या नए एसपी कबाड़ सिंडिकेट के कथित सरगना जानू और उसके नेटवर्क पर कोई ठोस और बड़ी कार्रवाई कर पाएंगे या फिर यह पूरा मामला फाइलों और औपचारिक बैठकों तक ही सीमित रह जाएगा। वहीं दूसरी ओर शहडोल संभाग में नए आईजी ने भी कुछ ही समय पहले अपना कार्यभार संभाला है। ऐसे में यह देखना बेहद अहम होगा कि नए आईजी संभाग के सभी जिलों के एसपी और पुलिस अधिकारियों से इस संगठित कबाड़ माफिया नेटवर्क के खिलाफ किस स्तर की कार्रवाई करवाते हैं। जनता के बीच अब यह चर्चा तेज हो चुकी है कि क्या नए पुलिस अधिकारी कानून व्यवस्था का इकबाल स्थापित कर पाएंगे या फिर कबाड़ सिंडिकेट का यह साम्राज्य पहले की तरह ही फलता-फूलता रहेगा। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्यशैली ही तय करेगी कि खाकी का भय कायम होता है या फिर माफियाओं का नेटवर्क और अधिक मजबूत होकर उभरता है।

अगले अंक में होगा बड़ा खुलासा,नाबालिग युवकों के नाम,गाड़ियों के नाम नम्बर,और चोरी के ठिकानों का पर्दाफाश

सूत्रों के अनुसार,इस पूरे सिंडिकेट में शामिल कुछ नाबालिग और युवकों की पहचान भी खोजी टीम के हाथ लगी है। बताया जा रहा है कि किन-किन चार पहिया वाहनों के माध्यम से रात के अंधेरे में चोरी का माल ढोया जाता है, किन कॉलरियों और औद्योगिक क्षेत्रों को निशाना बनाया जाता है, और किन रास्तों से यह कबाड़ सुरक्षित गोदामों तक पहुंचाया जाता है। इन तमाम पहलुओं से जुड़े कई अहम दस्तावेज और जानकारियां सामने आई हैं। जेके न्यूज,अपने अगले अंक में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे कर सकता है, जिसमें कथित तौर पर इस्तेमाल की जा रही गाड़ियों, सक्रिय युवकों और चोरी के चिन्हित क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा। इससे पूरे संभाग में सक्रिय कबाड़ सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की दरकार: रेलवे से लेकर रिलायंस तक के अधिकारी आएं दायरे में,शहडोल संभाग की छवि को धूमिल करने वाले इस कबाड़ कांड की जड़ें बेहद गहरी हैं। केवल छोटे-मोटे चोरों को पकड़कर केस डायरी बंद कर देने से इस सिंडिकेट का अंत नहीं होने वाला। आवश्यकता इस बात की है कि प्रदेश सरकार और गृह विभाग इस मामले को संज्ञान में लेकर एक निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन करे। इस जांच के दायरे में न केवल कबाड़ माफिया गुड्डू और जानू आने चाहिए, बल्कि रेलवे, रिलायंस और एसईसीएल (SECL) के वे तमाम जिम्मेदार अधिकारी और सुरक्षा प्रभारी भी आने चाहिए, जिनकी नाक के नीचे सरकारी खजाने को सरेआम लूटा जा रहा है। कानून व्यवस्था के इकबाल की परीक्षा, अब ठोस कार्रवाई का इंतजार,कुल मिलाकर, शहडोल और अनूपपुर,उमारिया जिलों में कबाड़ सिंडिकेट ने समानांतर व्यवस्था खड़ी कर दी है। बढ़ती चोरियों और युवाओं के भविष्य से हो रहे इस खिलवाड़ के कारण आम जनता के भीतर भारी आक्रोश पनप रहा है। यह पूरी स्थिति अब मध्य प्रदेश शासन, गृह मंत्रालय और स्थानीय पुलिस महानिरीक्षक (IG) व पुलिस अधीक्षकों (SP) के इकबाल की कड़ी परीक्षा है। यदि समय रहते इन दोनों मुख्य सरगनाओं और इनके पूरे सिंडिकेट पर कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो अंचल की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस खोजी रिपोर्ट के बाद कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर यह सिंडिकेट यूं ही बेखौफ होकर संभाग को खोखला करता रहेगा।

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