शासन नियमों को रौंदकर करोड़ों का कारोबार, प्रशासनिक सख्ती सिर्फ कागजों तक सीमित
Junaid Khan - शहडोल। जिला मुख्यालय में अवैध प्लॉटिंग का कारोबार अब खुलेआम फल-फूल रहा है। हालात यह हैं कि मुख्यालय के आसपास शायद ही कोई ऐसा इलाका बचा हो, जहां कृषि भूमि को नियमों की धज्जियां उड़ाकर कॉलोनियों और प्लॉटों में तब्दील न किया जा रहा हो। प्रशासनिक स्तर पर भले ही समय-समय पर सख्ती के दावे किए जाते हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है। अवैध प्लॉटिंग माफिया बेखौफ होकर करोड़ों का खेल खेल रहे हैं और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। ताजा मामला मेडिकल कॉलेज के पीछे स्थित ग्राम जमुआ का सामने आया है, जहां कृषि भूमि को बिना डायवर्सन, बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अनुमति और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के बड़े-बड़े प्लॉटों में काटकर बेचने का खेल चल रहा है। सूत्रों की मानें तो मेडिकल कॉलेज के आसपास जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं और इसी का फायदा उठाकर भू-माफिया कृषि भूमि को सोने की खान बना चुके हैं।
जानकारी के अनुसार ग्राम जमुआ के खसरा नंबर 17 यूनिक आईडी नंबर-1022428877819-FARDACC35HO) रकवा 0.1170 हेक्टेयर तथा खसरा नंबर 18 (यूनिक आईडी नंबर- 1023671079819-FR6DFCCP7HO) रकवा 1.6960 हेक्टेयर, कुल लगभग 4.19 एकड़ भूमि पर अवैध प्लॉटिंग की जा रही है। कुल प्लॉट एरिया लगभग 1 लाख 82 हजार 516 स्क्वायर फीट बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस भूमि का दाम लगभग ₹350 प्रति स्क्वायर फीट तय किया गया है, जिससे करोड़ों रुपए के कारोबार की आशंका जताई जा रही है।
इस प्रकार काटे गए प्लॉट
11345 स्क्वायर फीट के 7 प्लॉट, 13162 स्क्वायर फीट के 2 प्लॉट, 18733 स्क्वायर फीट का 1 प्लॉट, 17158 स्क्वायर फीट का 1 प्लॉट, 5348 स्क्वायर फीट का 1 प्लॉट, 6499 स्क्वायर फीट का 1 प्लॉट और 4902 स्क्वायर फीट का 1 प्लॉट बेचने के लिए बनाये गए हैं. सूत्र बताते हैं कि कई प्लॉटों के एग्रीमेंट भी ग्राहकों से कराए जा चुके हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कृषि भूमि पर इतनी बड़ी प्लॉटिंग बिना प्रशासन की जानकारी के कैसे संभव हो रही है. क्या राजस्व विभाग, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग और स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी, या फिर सबकुछ मिलीभगत से चल रहा है.
शासन के नियमों को खुली चुनौती
नियमों के मुताबिक किसी भी कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक उपयोग में लाने से पहले डायवर्सन, कॉलोनी विकास अनुमति, सड़क, नाली, बिजली, पानी और अन्य आधारभूत सुविधाओं की स्वीकृति लेना अनिवार्य होता है। लेकिन यहां सीधे खेतों को नापकर प्लॉट बेचने का खेल खेला जा रहा है। इससे न केवल शासन को लाखों रुपए के राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि भविष्य में खरीदारों के साथ भी बड़ा धोखा होने की आशंका है।
आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध कारोबार
शहर में लगातार बढ़ रही अवैध प्लॉटिंग अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में मेडिकल कॉलेज के आसपास पूरा क्षेत्र अवैध कॉलोनियों का जाल बन जाएगा। आमजन में यह चर्चा तेज है कि बिना संरक्षण के इतना बड़ा खेल संभव नहीं है।
कार्रवाई होगी या फिर चलता रहेगा खेल
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और जिम्मेदार विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हैं या फिर पहले की तरह केवल नोटिस और खानापूर्ति तक मामला सीमित रहेगा। यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो करोड़ों के इस अवैध प्लॉटिंग नेटवर्क से कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।
