खाकी के रक्षण में रेत का भक्षण, जयसिंहनगर में रसूखदारों का महासंग्राम,हर ट्रैक्टर ₹6000 की 'दैनिक एंट्री पर साधी चुप्पी

अखबार की सुगबुगाहट का बड़ा असर, विभाग में हड़कंप,पहले छपी खबरों के बाद भी बेखौफ सिंडिकेट,अब आरक्षक रोहित और नीरज पर उठे गंभीर सवाल


Junaid Khan - शहडोल। विंध्य क्षेत्र के शहडोल संभाग अंतर्गत जयसिंहनगर में रेत का अवैध कारोबार इन दिनों अपने चरम पर है। नदी की छाती चीरकर चौबीसों घंटे निकाले जा रहे पीले सोने के इस काले खेल ने अब सीधे प्रशासनिक इकबाल को खुली चुनौती दे दी है। हाल ही में मीडिया के गलियारों में हुई कुछ सुगबुगाहटों और पूर्व में सामने आईं मीडिया रिपोर्ट्स का असर प्रशासनिक महकमे में साफ देखने को मिल रहा है, लेकिन धरातल पर इस सिंडिकेट का हौसला टूटने का नाम नहीं ले रहा। सूत्रों की मानें तो इस पूरे अवैध नेटवर्क को कानून के रखवालों का ही खुला संरक्षण प्राप्त है, जिससे बेखौफ होकर रेत माफिया सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं।

₹6000 की 'दैनिक वसूली' का सनसनीखेज गणित, सीधे रडार पर 'खाकी' के कारिंदे

इस पूरे अवैध रेत परिवहन में सबसे चौंकाने वाला और गंभीर पहलू यह सामने आया है कि कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाकर प्रति ट्रैक्टर के हिसाब से एक निश्चित रकम की वसूली की जा रही है। चर्चा है कि जयसिंहनगर क्षेत्र में सक्रिय आरक्षक रोहित और नीरज की भूमिका इस पूरे मामले में संदेहास्पद बनी हुई है। अंदरखाने की खबरों के मुताबिक, यहां हर एक ट्रैक्टर से ₹6000 की 'डेली एंट्री' यानी दिन का फिक्स रेट तय कर खुलेआम लेनदेन का खेल चल रहा है। रक्षक ही जब भक्षक की भूमिका में नजर आने लगें, तो रेत माफियाओं के हौसले बुलंद होना लाजिमी है। यह सीधे तौर पर कानून व्यवस्था और जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की साख को खुली चुनौती है।

दबाव में सिस्टम या जानबूझकर अनदेखी? माफियाओं के सामने नतमस्तक प्रशासन 

स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ट्रैक्टरों की यह अवैध अंधी दौड़ मुख्य रास्तों से होकर गुजरती है, लेकिन मजाल है कि कभी इन पर कोई प्रभावी कार्रवाई हो। जब भी मीडिया में इस तरह की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित होती हैं, तो प्रशासनिक अमला महज दिखावे के लिए एक-दो ट्रैक्टरों पर कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपा लेता है। लेकिन सच तो यह है कि ₹6,000 प्रति ट्रैक्टर की यह कथित दैनिक डीलिंग इतनी मजबूत है कि रसूखदारों और खाकी के कुछ मददगारों का यह गठजोड़ तोड़ने में पूरा सिस्टम पंगु नजर आ रहा है।

माननीय कप्तान साहब! क्या दागदार वर्दी पर चलेगी आपकी ईमानदारी का चाबुक?

अब सबसे बड़ा सवाल शहडोल पुलिस कप्तान और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों की नीयत पर खड़ा होता है। क्या विभाग के मुखिया अपने ही महकमे के इन कथित रूप से दागी आरक्षकों और रेत माफियाओं के इस गठजोड़ को ध्वस्त करेंगे? या फिर हर बार की तरह इस बार भी इस महालूट पर पर्दा डाल दिया जाएगा? बहरहाल, इस खुलासे के बाद पूरे जयसिंहनगर और जिला मुख्यालय के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। देखना यह है कि कानून को अपनी जेब में रखकर चलने वाले इन आरक्षकों और बेखौफ रेत चोरों पर कब और क्या ठोस कानूनी कार्रवाई होती है, या फिर यह '६ हजार की दैनिक मलाई' इसी तरह तंत्र को खोखला करती रहेगी।

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