मौत का कुआं बने शहर के अवैध दलदली प्लॉट, 07 घंटे के 'महा-रेस्क्यू' ने खोली नपा और भू-माफियाओं की पोल

बड़ी भीट तालाब के पास अवैध रूप से पाटे गए गड्ढे में तड़पती रही गौ-माता,नंदी गौ सेवा धाम के जांबाजों ने जान पर खेलकर बचाई जान, सोता' रहा प्रशासन


Junaid Khan - शहडोल। शहर के वार्ड क्रमांक 16 स्थित बड़ी भीट तालाब के समीप धड़ल्ले से चल रहे अवैध प्लॉटिंग और भू-माफियाओं के खेल ने एक बेजुबान की जान को दांव पर लगा दिया। यहाँ एक दलदलनुमा अवैध रूप से पाटे गए प्लॉट में फंसी गौ माता को आखिरकार 'नंदी गौ सेवा धाम' के जांबाजों ने अपनी जान पर खेलकर 7 घंटे चले रोंगटे खड़े कर देने वाले 'महा-रेस्क्यू ऑपरेशन' के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बीती रात से भूखे-प्यासे और कीचड़ में तड़प रहे गोवंश की इस दुर्दशा पर स्थानीय नागरिकों ने जब आक्रोश जताया, तब जाकर सोए हुए सिस्टम की नींद टूटी। हमारे अखबार द्वारा इस क्षेत्र में लगातार हो रहे अवैध उत्खनन और तालाबों के संरक्षण को लेकर पूर्व में प्रकाशित खबरों का बड़ा असर देखने को मिला है, जिससे जागे जागरूक नागरिकों ने तत्काल इसकी सूचना गो-सेवकों को दी। यदि समय पर यह देवदूत न पहुंचते, तो नगर पालिका की लापरवाही आज एक और बेजुबान की बलि ले चुकी होती। जहरीले कीड़े और जोंक के बीच 50 मीटर अंदर उतरे 'देवदूत' रोंगटे खड़े कर देने वाला था मंजर,घटनाक्रम के अनुसार, मुख्य सड़क से लगभग 50 मीटर दूर गहरे और जानलेवा दलदल में गो-माता इस कदर धंस चुकी थी कि उसका स्वयं बाहर निकल पाना असंभव था। जैसे ही इसकी भनक नंदी गौ सेवा धाम के जांबाजों को लगी, वे बिना एक पल गंवाए मौके पर मोर्चा संभालने पहुंच गए। रेस्क्यू का मंजर इतना खौफनाक था कि दलदल में हजारों कीड़े-मकोड़े और खून चूसने वाली जोंक भरी हुई थीं। लेकिन प्रशासनिक अमले की बेरुखी के बीच, समाज के इन असली नायकों अमन यादव, विकास जोतवानी, सिद्धांत, पिंकू रजक, दीपक सिंह और दीपू ने अपनी जान की परवाह न करते हुए उस खौफनाक दलदल में छलांग लगा दी। पूरे 6 से 7 घंटे तक चले इस अथक और रोंगटे खड़े कर देने वाले संघर्ष के दौरान जब स्थितियां काबू से बाहर होने लगीं, तब समाजसेवी सिल्लू रजक ने तत्काल निजी खर्च पर जेसीबी मशीन की व्यवस्था कराई। कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार तड़पती हुई गो-माता को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका, जिसे देखकर मौके पर मौजूद सैकड़ों नागरिकों की आंखें नम हो गईं और उन्होंने गो-सेवकों के इस अदम्य साहस को सलाम किया। 

भू-माफियाओं की अवैध प्लॉटिंग और नपा की मौन सुई,आखिर कब तक बेजुबान भुगतेंगे सजा? 

यह कोई पहला मामला नहीं है। वार्ड 16 का यह पूरा इलाका इन दिनों भू-माफियाओं और अवैध निर्माणकर्ताओं की शरणस्थली बन चुका है। तालाबों के कैचमेंट एरिया और गहरे गड्ढों को बिना किसी सुरक्षा मानकों के, केवल मिट्टी और कचरा डालकर अवैध रूप से पाटा जा रहा है, जो बारिश के आते ही 'मौत का कुआं' शक्ल अख्तियार कर लेते हैं। नगर पालिका का अमला दफ्तरों में बैठकर फाइलों को हरा करने में व्यस्त है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि इन जानलेवा दलदलों पर न तो कोई बैरिकेडिंग की गई है और न ही अवैध काम करने वालों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई। प्रशासन की इसी काहिली और मौन संरक्षण के कारण आज शहर के तालाब और उनके किनारे अवैध कॉलोनाइजरों की भेंट चढ़ रहे हैं, जिससे आए दिन ऐसे हादसे सामने आ रहे हैं। पशुपालक भी निभाएं जिम्मेदारी, बेसहारा छोड़ना अमानवीय; पूरे क्षेत्र में थू-थू इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे के बाद स्थानीय जनता में जहां एक ओर नंदी गौ सेवा धाम के प्रति अगाध श्रद्धा और सम्मान है, वहीं दूसरी ओर लापरवाह पशुपालकों और जिला प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। प्रबुद्ध नागरिकों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चंद रुपयों के लालच में गोवंश को बेसहारा छोड़ देने वाले पशुपालक भी इस पाप के बराबर के भागीदार हैं। गोवंश की जिम्मेदारी समझना हर नागरिक का परम कर्तव्य है, उन्हें इस तरह अमानवीय ढंग से सड़कों और मौत के गड्ढों में लावारिस छोड़ना घोर अपराध है। क्षेत्रभर में नंदी गौ सेवा धाम के इस ऐतिहासिक रेस्क्यू की सराहना हो रही है, तो वहीं दूसरी ओर यह घटना शहर के हुक्मरानों के मुंह पर एक करारा तमाचा भी है कि जो काम करोड़ों का बजट डकारने वाली नगर पालिका को करना चाहिए था, उसे चंद युवाओं ने अपनी जान हथेली पर रखकर कर दिखाया।

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