बिजली विभाग की आंख-मिचौली से बेहाल धनपुरी,अस्पताल अंधेरे में,जनता गर्मी में तड़पने को मजबूर

बिजली विभाग की आंख-मिचौली से बेहाल धनपुरी,अस्पताल अंधेरे में,जनता गर्मी में तड़पने को मजबूर


Junaid Khan - शहडोल। धनपुरी में इन दिनों धनपुरी नगर में यह कोई फिल्मी गीत नहीं, बल्कि जनता की रोजमर्रा की जिंदगी का राष्ट्रीय गान बन चुका है। बच्चे जहां बिजली विभाग की आंख-मिचौली को अंताक्षरी में गाकर समय काट रहे हैं, वहीं बुजुर्ग पसीने में भीगते हुए दर्दभरी आवाज में कहते नजर आते हैं। यही रात अंतिम… यही रात भारी… हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोग अब बिजली आने पर नहीं, बल्कि कब जाएगी इस पर दांव लगाने लगे हैं। भीषण गर्मी में धनपुरी की जनता रातभर जागकर मच्छरों, उमस और बिजली विभाग की कृपा का आनंद लेने को मजबूर है। कोई छत पर टहल रहा है, कोई सड़क किनारे हवा ढूंढ रहा है, तो कोई मोबाइल की टॉर्च जलाकर बच्चों को बहला रहा है। ऐसा लग रहा है मानो नगर में बिजली सप्लाई नहीं, बल्कि “लुका-छिपी प्रतियोगिता” चल रही हो और विभाग हर हाल में पहला पुरस्कार जीतने पर आमादा हो। सबसे मजेदार बात यह है कि विभाग के पास हर सवाल का जवाब तैयार रहता है। लोड ज्यादा है”डीओ उड़ गया”लाइन फाल्ट है,मानो वर्षों से यही तीन वाक्य विभाग की सरकारी पाठ्यपुस्तक में छपे हों। जनता पूछती है कि आखिर ट्रांसफार्मर कब बदलेंगे? तो जवाब में सिर्फ आश्वासन की मोमबत्ती जला दी जाती है। अब स्थिति यह हो गई है कि लोग रातें काटने के लिए मजाक, व्यंग्य और अंताक्षरी का सहारा ले रहे हैं, क्योंकि बिजली पर भरोसा करना अब किसी चमत्कार से कम नहीं। जनता करे भी तो क्या? बिल समय पर भरिए, बदले में अंधेरा मुफ्त पाइए,शायद यही धनपुरी बिजली विभाग की नई जनकल्याणकारी योजना है।,धनपुरी में इन दिनों बिजली नहीं, बल्कि जनता की सहनशक्ति सप्लाई हो रही है,वह भी बार-बार ट्रिप होकर। नगर की हालत ऐसी हो चुकी है कि लोग रात को सोने से पहले भगवान से कम और बिजली विभाग से ज्यादा प्रार्थना कर रहे हैं। लेकिन विभाग शायद इस भ्रम में जी रहा है कि जनता अंधेरे में रहने की अभ्यस्त हो चुकी है। भीषण गर्मी में जब तापमान लोगों की सांसें सुखा रहा है, तब धनपुरी विद्युत विभाग अपनी पुरानी परंपरा निभाते हुए “लोड ज्यादा है”डीओ उड़ गया“लाइन फाल्ट है” जैसे बहानों की आरती उतारने में व्यस्त है। नगर में लगे ट्रांसफार्मरों की हालत देखकर ऐसा लगता है मानो वे अंग्रेजों के जमाने की विरासत हों, जिन्हें केवल इसलिए बचाकर रखा गया है ताकि विभाग हर दूसरे दिन फाल्ट का नया बहाना गढ़ सके। जर्जर केबलें गर्मी में वैसे ही पिघल रही हैं जैसे आम आदमी का धैर्य। लेकिन अफसरों की संवेदनाएं शायद वातानुकूलित कमरों में बैठते-बैठते जम चुकी हैं। सबसे दुखद स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनपुरी में मरीज बीमारी से कम और बिजली विभाग की कृपा से ज्यादा परेशान हैं। डायलिसिस मशीन बंद, वेंटिलेटर बंद, जरूरी उपकरण बंद,लेकिन जिम्मेदारों का विवेक पूरी तरह चालू है, क्योंकि बिल वसूली का सिस्टम कभी बंद नहीं होता। जनता यदि समय पर बिजली बिल जमा न करे तो विभाग का रवैया ऐसा होता है मानो किसी ने राष्ट्रीय खजाना लूट लिया हो। नोटिस, धमकी, कोर्ट और कार्रवाई,सब तुरंत तैयार। लेकिन जब जनता पूछे कि आखिर रोज-रोज बिजली क्यों काटी जा रही है, तब विभागीय अधिकारी ऐसे मुंह फेर लेते हैं जैसे उनसे देश की सुरक्षा का गोपनीय सवाल पूछ लिया गया हो। बीते दिनों रात 1 बजे से लेकर 3 बजे तक बिजली गुल रही। उमस और गर्मी ने लोगों को घरों से बाहर निकाल दिया। गलियों में लोग ऐसे टहलते नजर आए जैसे किसी धार्मिक अनुष्ठान की रात्रि जागरण यात्रा चल रही हो। बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल, बुजुर्ग पसीने से बेहाल और मरीजों की हालत भगवान भरोसे। पड़ोस में रहने वाली एक गर्भवती महिला ने दर्द भरी आवाज में कहा कि “घर में कूलर नहीं है, केवल पंखे के सहारे रात गुजरती है, लेकिन बिजली कटते ही लगता है कि जिंदगी ही रुक जाएगी। मगर विभाग के लिए यह शायद रोजमर्रा की सामान्य सूचना भर है। नगरवासियों का कहना है कि बिजली विभाग अब सेवा नहीं, “सहनशक्ति परीक्षण केंद्र” बन चुका है। जनता हर महीने अपना पेट काटकर बिजली बिल भरती है, लेकिन बदले में उसे मिलती है अंधेरे की ईएमआई। ऊपर से घरों के महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जल रहे हैं। फ्रिज, टीवी, कूलर, पंखे सब वोल्टेज की आंख-मिचौली में दम तोड़ रहे हैं। मगर विभाग की ओर से कोई जवाबदेही नहीं। मानो उपभोक्ता नहीं, प्रयोगशाला के चूहे हों जिन पर रोज नया प्रयोग किया जा रहा हो। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर धनपुरी की जनता कब तक इस बिजली विभाग की लापरवाही की तपस्या करती रहेगी? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? या फिर अधिकारी यह मान चुके हैं कि जनता केवल बिल भरने के लिए पैदा हुई है, सुविधाएं मांगने के लिए नहीं? धनपुरी की जनता अब तंग आ चुकी है। लोग कहने लगे हैं कि यहां बिजली नहीं आती, केवल उसकी यादें आती हैं। और हर अंधेरी रात में एक ही पंक्ति गूंजती है।“यही रात अंतिम, यही रात भारी…

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