स्वच्छता के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट,मच्छरों के हवाले धनपुरी,दीवारें चमकीं लेकिन वार्डों में बजबजा रही गंदगी

स्वच्छता के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट,मच्छरों के हवाले धनपुरी,दीवारें चमकीं लेकिन वार्डों में बजबजा रही गंदगी


Junaid Khan - शहडोल। धनपुरी नगर इन दिनों भीषण मच्छर आतंक, बदहाल सफाई व्यवस्था और अघोषित बिजली संकट से जूझ रहा है, लेकिन नगर पालिका परिषद को जनता की तकलीफों से ज्यादा चिंता दीवारों की रंगाई-पुताई और दिखावटी स्वच्छता अभियान की दिखाई दे रही है। शहर की सच्चाई यह है कि वार्डों में गंदगी का अंबार लगा है, नालियां बजबजा रही हैं, मच्छरों के कारण लोगों का जीना दूभर हो चुका है, लेकिन नगर पालिका लाखों रुपये खर्च कर दीवारों पर स्वच्छता के नारे लिखवाकर खुद अपनी पीठ थपथपा रही है। नगर में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर स्वच्छता अभियान जनता की सुविधा के लिए चलाया जा रहा है या फिर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए? जनचर्चाओं में खुलेआम आरोप लगाए जा रहे हैं कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी सुश्री पूजा बुनकर के कार्यकाल में स्वच्छता अभियान कमाई का अभियान” बनकर रह गया है। शहर की टूटी सड़कों, गंदे नालों और मच्छरों से त्रस्त वार्डों को नजरअंदाज कर लाखों रुपये सिर्फ पेंटिंग और रंग-रोगन पर उड़ाए जा रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि शाम ढलते ही वार्डों में मच्छरों का आतंक शुरू हो जाता है। लोग घरों के बाहर बैठना तो दूर, दरवाजे और खिड़कियां खोलने से भी डरने लगे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की रातें मच्छरों के कारण जागकर कट रही हैं। नगर में लगातार हो रही बिजली कटौती ने हालात को और भयावह बना दिया है। बिजली गुल होते ही मच्छरों का हमला शुरू हो जाता है और लोगों को रातभर तड़पना पड़ता है। लेकिन नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों को जनता की इस पीड़ा से कोई सरोकार नजर नहीं आता। सबसे बड़ा सवाल उन लाखों रुपये की फॉगिंग मशीनों पर खड़ा हो रहा है जिन्हें मच्छर नियंत्रण के नाम पर खरीदा गया था। आखिर वे मशीनें कहां हैं? नगरवासियों का आरोप है कि अधिकांश मशीनें कबाड़ में पड़ी धूल खा रही हैं और जो कुछ चालू हालत में हैं उनका उपयोग भी सिर्फ दिखावे के लिए किया जाता है। नगर पालिका कार्यालय से निकलने वाली फॉगिंग गाड़ियां कुछ मुख्य मार्गों तक धुआं छोड़कर वापस लौट जाती हैं, जबकि असली समस्या वाले वार्डों में महीनों तक फॉगिंग नहीं होती। विशेषज्ञ बताते हैं कि मच्छर नियंत्रण के लिए उपयोग की जाने वाली फॉगिंग मशीन या थर्मल फॉगर का उद्देश्य संक्रमित क्षेत्रों में कीटनाशक धुआं फैलाकर मच्छरों को खत्म करना होता है। लेकिन धनपुरी में यह पूरी व्यवस्था सिर्फ फाइलों और बिलों तक सीमित दिखाई दे रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि नियमित फॉगिंग हो रही है तो फिर वार्डों में मच्छरों की संख्या लगातार क्यों बढ़ रही है? स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका हर साल मच्छर मारने की दवाओं और सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर न सफाई दिखाई देती है और न मच्छरों में कोई कमी। आरोप तो यहां तक लगाए जा रहे हैं कि फॉगिंग और सफाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। जनता का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है, लेकिन परिणाम शून्य हैं। विडंबना देखिए कि एक ओर नगर पालिका जनता पर हाउस टैक्स और पानी टैक्स का अतिरिक्त बोझ डाल रही है, वहीं दूसरी ओर मूलभूत सुविधाएं देने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। वार्डों में नालियों की सफाई नहीं हो रही, कचरा समय पर नहीं उठ रहा, जगह-जगह गंदगी फैली हुई है और मच्छरों का आतंक चरम पर है। इसके बावजूद नगर पालिका का पूरा ध्यान केवल दीवारों को चमकाने और फोटोबाजी में लगा हुआ है। नगरवासियों का साफ कहना है कि अब उन्हें भाषण, नारे और रंगीन दीवारें नहीं चाहिए। जनता जानना चाहती है कि आखिर स्वच्छता के नाम पर खर्च हो रहे करोड़ों रुपये का हिसाब कौन देगा? अगर नगर पालिका वास्तव में स्वच्छता को लेकर गंभीर है तो वार्डों में नियमित सफाई अभियान चलाए, नालियों की सफाई कराए और हर मोहल्ले में प्रभावी फॉगिंग कराए। वरना जनता के बीच यह धारणा और मजबूत होती जाएगी कि धनपुरी में स्वच्छता नहीं, बल्कि सिर्फ भ्रष्टाचार का धुआं उड़ाया जा रहा है।

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